
हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में राम नवमी के पावन अवसर परबाबा रामदेव ने अपना 32वां संन्यास दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों को नवरात्री की पूर्णता और रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। 🙏
बाबा रामदेव ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे जीवन में राम का रामत्व, कृष्ण का कृष्णत्व, शिव का शिवत्व और आत्मत्व स्थापित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हमारे जीवन में देवी संपदा नहीं है, तो हम सच्चे अर्थों में सनातनी और राम-कृष्ण की वंश परंपरा के साधक नहीं बन सकते।
उन्होंने यह भी बताया कि आज का दिन विशेष है, क्योंकि नवरात्रि की पूर्णता, पतंजलि का यशस्वी संन्यास दिवस और रामनवमी—तीनों पर्व एक साथ मनाए जा रहे हैं, जो आध्यात्मिक ऊर्जा और राष्ट्रीय चेतना का संदेश देते हैं।
इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने भगवान श्रीराम के आदर्शों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राम के जीवन मूल्यों—मर्यादा, सत्य और कर्तव्य—को अपनाकर ही समाज और राष्ट्र का सशक्त निर्माण संभव है।
बाबा रामदेव ने पतंजलि के पिछले 32 वर्षों के योगदान को शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संस्था आगे भी योग, आयुर्वेद और स्वदेशी के माध्यम से देश की सेवा करती रहेगी।