1.0090 हेक्टेयर भूमि पर यथास्थिति के आदेश, चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश; अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को
हरिद्वार,16 सितम्बर ।
बहादराबाद ग्राम में ग्राम समाज की 1.0090 हेक्टेयर भूमि के निजी भूमि से कथित अवैध विनिमय से जुड़े मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में बुधवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने संबंधित भूमि के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने और कोई नया तृतीय-पक्ष हित सृजित नहीं करने के निर्देश दिए हैं।
मामला WPMS/2714/2026 से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया है कि ग्राम समाज की उक्त भूमि का प्रेवेश कुमारी की निजी भूमि से किया गया विनिमय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के विपरीत था। याचिकाकर्ताओं ने इस पूरी प्रक्रिया में ग्राम एवं जिला प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
ग्राम समाज की भूमि पर प्लॉटिंग का आरोप
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, विनिमय के बाद उक्त भूमि को कथित तौर पर प्रॉपर्टी बिल्डर/डेवलपर सतीश त्यागी एवं अभिषेक त्यागी को बेच दिया गया। आरोप है कि इसके बाद भूमि पर मौजूद करीब 120 आम के पेड़ों सहित अन्य वृक्षों को हटाकर हरित आवरण को नुकसान पहुंचाया गया और वहां व्यावसायिक प्लॉटिंग की गई।
याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि तैयार किए गए भूखंडों को आगे तीसरे पक्षों को बेचा गया। इसी कारण मामले में हाईकोर्ट द्वारा तृतीय-पक्ष हित सृजित न करने संबंधी निर्देश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वैधानिक मंचों पर भी उठाया गया था मामला
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, इस प्रकरण को लेकर पूर्व में जनहित याचिका भी दायर की गई थी। हालांकि, वैकल्पिक वैधानिक उपाय अपनाने के निर्देश के साथ उस याचिका का निस्तारण किया गया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने मामले को आयुक्त एवं राजस्व बोर्ड के समक्ष उठाया, लेकिन उनकी याचिकाएं लोकस स्टैंडी के आधार पर खारिज कर दी गईं।
इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने मामले में मातृ सदन से कानूनी सहायता मांगी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, मामले में सामने आए कथित कानूनी एवं प्रशासनिक पहलुओं का परीक्षण करने के बाद मातृ सदन ने इस प्रकरण को आगे उठाने का निर्णय लिया।
हाईकोर्ट के आदेश से बढ़ी निगाहें
आज की सुनवाई में हाईकोर्ट ने ग्राम सभा एवं संबंधित प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही प्रतिवादी संख्या 6 एवं 7 को नोटिस जारी किया गया है।
न्यायालय ने विवादित भूमि के संबंध में वर्तमान स्थिति बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार का नया तृतीय-पक्ष अधिकार/हित उत्पन्न नहीं करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
अब आगामी सुनवाई में संबंधित पक्षों के जवाब और दस्तावेज न्यायालय के समक्ष आने के बाद इस पूरे प्रकरण की कानूनी स्थिति पर आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है। विशेष रूप से ग्राम समाज की भूमि के विनिमय, उसके बाद हुए कथित हस्तांतरण, पेड़ों को हटाने और प्लॉटिंग से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल हाईकोर्ट के यथास्थिति संबंधी आदेश के बाद विवादित भूमि पर आगे किसी भी प्रकार की स्थिति बदलने वाली कार्रवाई पर न्यायिक निगरानी बनी रहेगी।