वरिष्ठ सदस्यों और उल्लेखनीय योगदान देने वालों को मिलेगा विशेष सम्मान, हर कार्यकारिणी सदस्य बनाएगा कम से कम 10 नए आजीवन सदस्य…
हरिद्वार, 14 सितम्बर।
ऋषिकुल स्नातक एवं स्नातकोत्तर एसोसिएशन की कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक अध्यक्ष प्रो. बी.के. अग्निहोत्री की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में एसोसिएशन के संगठनात्मक विस्तार, पूर्व छात्रों को एक मंच पर जोड़ने, वरिष्ठ एवं विशिष्ट सदस्यों के सम्मान, आगामी कार्यक्रमों, सामाजिक गतिविधियों तथा संगठन को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाने सहित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में लिए गए निर्णयों को एसोसिएशन के भविष्य के विस्तार और संगठन को अधिक प्रभावी स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यकारिणी ने स्पष्ट किया कि ऋषिकुल से जुड़े पूर्व छात्रों एवं सदस्यों की विशेषज्ञता, अनुभव और सेवाओं को एक साझा मंच पर लाकर संगठन की गतिविधियों को और व्यापक बनाया जाएगा।
50 वर्ष पूरे करने वाले सदस्यों को मिलेगा स्वर्ण जयंती सम्मान
बैठक का प्रमुख निर्णय वर्ष 1976 में स्नातक हुए सदस्यों को लेकर रहा। कार्यकारिणी ने निर्णय लिया कि स्नातक शिक्षा पूर्ण किए जाने के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ऐसे सदस्यों को “स्वर्ण जयंती सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा।
इसी क्रम में एसोसिएशन से जुड़े ऐसे स्नातक एवं स्नातकोत्तर सदस्यों को, जिन्होंने संगठन के साथ अपने जुड़ाव के 25 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं, “रजत जयंती सम्मान” प्रदान किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्यों तथा संस्था के विकास, विस्तार और गतिविधियों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सदस्यों को भी विशेष सम्मान प्रदान करने पर सहमति बनी। इससे लंबे समय से संगठन के लिए कार्य कर रहे सदस्यों के अनुभव और योगदान को सार्वजनिक रूप से सम्मान देने की पहल को बल मिलेगा।
ACP की तर्ज पर सेवाकाल के आधार पर विशेष सम्मान
बैठक में अध्यक्ष की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा गया कि ACP की तर्ज पर 8 वर्ष, 16 वर्ष और 25 वर्ष का सेवाकाल अथवा निर्धारित अवधि पूर्ण करने वाले पात्र सदस्यों को उनके सेवाकाल एवं योगदान के अनुरूप विशेष सम्मान और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए जाएं।
इसके लिए लगभग 25 सदस्यों की प्रारंभिक सूची तैयार किए जाने तथा आगामी सम्मान समारोह में इन सदस्यों को शामिल किए जाने पर विचार किया गया। कार्यकारिणी का मानना है कि इस प्रकार का सम्मान संगठन से जुड़े सदस्यों में उत्साह बढ़ाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ी को भी संस्था से सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा।
संगठन को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति
बैठक में एसोसिएशन को आर्थिक रूप से मजबूत और दीर्घकालीन रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए आजीवन सदस्यता अभियान को गति देने का निर्णय लिया गया।
कार्यकारिणी के प्रत्येक सदस्य को कम से कम 10 नए आजीवन सदस्य संगठन से जोड़ने के लिए प्रेरित करने पर सहमति बनी। उद्देश्य यह है कि अधिक से अधिक पूर्व छात्र एसोसिएशन से औपचारिक रूप से जुड़ें और संगठन की गतिविधियों को व्यापक आधार मिल सके।
बैठक में आर्थिक संसाधनों को मजबूत करने के लिए स्वैच्छिक सहयोग का सुझाव भी सामने आया। सुविधा-संपन्न सदस्यों से संगठन के हित में प्रति व्यक्ति ₹1 लाख तक का स्वैच्छिक सहयोग प्राप्त करने का प्रस्ताव रखा गया। लगभग 100 सहयोगदाताओं के माध्यम से एक मजबूत निधि तैयार करने की योजना पर भी चर्चा हुई।
प्रस्ताव के अनुसार इस निधि से प्राप्त ब्याज का उपयोग प्रतिवर्ष एसोसिएशन के सम्मेलन और अन्य निर्धारित कार्यक्रमों के आयोजन में किया जा सकता है। इच्छुक दानदाताओं की सूची तैयार करने और स्वैच्छिक सहयोग प्राप्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
ऋषिकुल के पूर्व छात्रों का बनेगा व्यापक नेटवर्क
बैठक में एसोसिएशन को ऋषिकुल से जुड़े अधिक से अधिक पूर्व छात्रों तक पहुंचाने और एक व्यापक नेटवर्क तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
प्रो. सुनील कुमार जोशी ने ऋषिकुल परिसर में वर्तमान में कार्यरत ऋषिकुल के स्नातक एवं स्नातकोत्तर सदस्यों की सूची तैयार कर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा। इससे वर्तमान में परिसर में सेवाएं दे रहे पूर्व छात्रों की पहचान कर उन्हें एसोसिएशन की गतिविधियों से और मजबूती से जोड़ने में मदद मिलेगी।
वहीं डॉ. नरेश कुमार चौधरी ने रेड क्रॉस की तर्ज पर एसोसिएशन के सदस्यों की विभिन्न श्रेणियां निर्धारित करने का सुझाव दिया। उनका उद्देश्य सदस्यों की विशेषज्ञता, सेवाकाल और संगठन में योगदान के आधार पर उन्हें व्यवस्थित रूप से जोड़ना है।
इस पहल से भविष्य में एसोसिएशन के पास अपने सदस्यों का एक व्यवस्थित नेटवर्क और विशेषज्ञता-आधारित डेटाबेस तैयार होने की संभावना है।
वरिष्ठ और विशिष्ट सदस्यों को सम्मान देने पर जोर
एसोसिएशन के सचिव डॉ. वेद भूषण शर्मा ने वरिष्ठ एवं विशिष्ट सदस्यों को सम्मानित किए जाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि संगठन की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सदस्यों के अनुभव और सेवाओं को सम्मानित करना संस्था की परंपरा और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा दोनों है।
उन्होंने पूर्व जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत द्वारा परिसर में कराए गए पौधरोपण कार्य के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने जिला समन्वय समिति के गठन का प्रस्ताव रखा, जिसे कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।
विश्वविद्यालय और अधिकारी स्तर पर होगा समन्वय
बैठक में आगामी कार्यक्रम के आयोजन, आमंत्रित अतिथियों और कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से आयोजित करने के लिए आवश्यक तैयारियां एवं समन्वय करने का निर्णय लिया गया।
इसके अलावा विश्वविद्यालय एवं संबंधित अधिकारी स्तर पर आवश्यक समन्वय स्थापित कर एसोसिएशन से जुड़े विषयों और आगामी कार्यक्रमों को लेकर वार्ता करने पर भी सहमति बनी।
वरिष्ठों के अनुभव और युवाओं की ऊर्जा से मजबूत होगा संगठन
एसोसिएशन के प्रचार मंत्री डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय ने संगठन की वर्तमान प्रगति और विभिन्न गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए उसके सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ सदस्यों का अनुभव और युवा सदस्यों की ऊर्जा यदि एक साथ काम करे तो एसोसिएशन को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। उन्होंने संगठन के विस्तार के लिए अधिक से अधिक सदस्यों को सक्रिय रूप से जोड़ने और एसोसिएशन की गतिविधियों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया।
सभी प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मिली मंजूरी
बैठक में प्रस्तुत सभी प्रस्तावों पर उपस्थित पदाधिकारियों और सदस्यों ने विस्तारपूर्वक चर्चा की। आवश्यक सुझावों एवं संशोधनों के बाद विभिन्न प्रस्तावों को सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया।
कार्यकारिणी की बैठक में लिए गए निर्णयों से यह संकेत मिला कि एसोसिएशन आने वाले समय में केवल पूर्व छात्रों के संगठन के रूप में सीमित न रहकर सामाजिक, शैक्षणिक और संगठनात्मक गतिविधियों का एक प्रभावी मंच बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
रसगुल्ले से हुआ बैठक का समापन
बैठक के अंत में पदेन सदस्य डॉ. उदय नारायण पांडेय ने सभी उपस्थित सदस्यों का रसगुल्ले से मुंह मीठा कराया। सौहार्दपूर्ण और आत्मीय वातावरण में बैठक का समापन हुआ।
बैठक में डॉ. रमेशचन्द्र गोयल, संरक्षक; डॉ. देवेन्द्र शर्मा चमोली, संरक्षक; डॉ. विनीत कुमार अग्निहोत्री, अध्यक्ष; प्रो. सुशील कुमार जोशी, संरक्षक; डॉ. टी.के. गर्ग; डॉ. अशोक पालीवाल; डॉ. प्रेम प्रकाश सतलेवाल; डॉ. नरेश कुमार चौधरी; डॉ. उदय नारायण पांडेय; डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय, प्रचार मंत्री; डॉ. पारुल शर्मा; डॉ. मनीषा दीक्षित; डॉ. बीरेंद्र नाथ; डॉ. वेद भूषण शर्मा; डॉ. यादवेन्द्र यादव तथा डॉ. गोपाल कृष्ण शर्मा सहित कार्यकारिणी के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।