देहरादून,

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज होने के संकेत हैं। आगामी चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से भारत निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती एवं स्थानांतरण को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

निर्वाचन आयोग के इन निर्देशों के बाद प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस विभागों में बड़े स्तर पर तबादलों की संभावना जताई जा रही है। खास बात यह है कि चुनावी प्रक्रिया से सीधे जुड़े ऐसे अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनात नहीं रखा जाएगा, जिन्होंने पिछले चार वर्षों के दौरान किसी एक जिले में तीन वर्ष या उससे अधिक का कार्यकाल पूरा कर लिया है अथवा 31 मार्च 2027 तक पूरा कर लेंगे।

किन अधिकारियों पर लागू होंगे नियम?

निर्वाचन आयोग की स्थानांतरण नीति मुख्य रूप से चुनाव प्रक्रिया से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े अधिकारियों पर लागू होगी। इनमें जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), उप जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर (RO), सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (ARO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) सहित चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारी शामिल हैं।

27 अक्टूबर को जारी किए गए निर्देश

जानकारी के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने 27 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड सहित गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर स्थानांतरण नीति के पालन के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड सहित चार राज्यों में तीन वर्ष के कार्यकाल की गणना के लिए 31 मार्च 2027 की तारीख निर्धारित की गई है, जबकि उत्तर प्रदेश के लिए यह समय-सीमा 31 मई 2027 रखी गई है।

क्यों जरूरी है यह प्रशासनिक बदलाव?

निर्वाचन आयोग का उद्देश्य लंबे समय से एक ही जिले में तैनात अधिकारियों के प्रभाव को सीमित करना और चुनाव के दौरान प्रशासनिक एवं पुलिस व्यवस्था को निष्पक्ष बनाए रखना है। आयोग चाहता है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी अधिकारी की स्थानीय स्तर पर लंबे समय से बनी प्रशासनिक पकड़ का संभावित प्रभाव न पड़े और सभी राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों को समान अवसर मिल सकें।

हालांकि, यह व्यवस्था सभी विभागों और कर्मचारियों पर समान रूप से लागू नहीं होगी। तबादलों का दायरा मुख्य रूप से चुनाव से सीधे जुड़े पदों और निर्धारित पात्रता वाले अधिकारियों तक सीमित रहेगा।

अब नजरें शासन के अगले कदम पर

निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बाद अब उत्तराखंड शासन और संबंधित विभागों की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं। यदि इन निर्देशों के अनुरूप स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होती है, तो चुनावी तैयारियों के बीच प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

MH7News | देहरादून

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