संस्कृत विभिन्न संस्कृति की “एकता, सदाचरण एवं विज्ञान की भाषा “- स्वामी चिदानन्द मुनि जी महाराज…

हरिद्वार, 23 अक्टूबर।
उत्तराखंड संस्कृत संस्थान की ओर से 18वें संस्कृत महोत्सव के अंतर्गत राज्य स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिता 2026-27 का शुभारंभ हरिद्वार के भूपतवाला स्थित महाजन भवन में भव्य रूप से किया गया। दो दिवसीय इस आयोजन में प्रदेश के सभी 13 जनपदों के प्रतिभागी विभिन्न संस्कृत प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी चिदानंद मुनि महाराज के पावन सानिध्य में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार तथा अध्यक्षता नगर निगम हरिद्वार की महापौर किरण जैसल ने की। इस अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. नवीन चंद्र पंत, सचिव प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार, संस्कृत शिक्षा निदेशालय की निदेशक मंजू भारती, उपनिदेशक डॉ. वाजश्रवा आर्य, वित्त अधिकारी माया देवी तथा संस्कृत भारती उत्तराखंड के प्रांत अध्यक्ष डॉ. आनंद भारद्वाज सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

उद्घाटन समारोह में पतंजलि गुरुकुलम, टिहरी की छात्राओं ने वैदिक मंगलाचरण और वंदे मातरम् की प्रस्तुति दी। वहीं, डायनेस्टी मॉडर्न गुरुकुल एकेडमी, खटीमा के छात्र-छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर प्रतियोगिता का विधिवत शुभारंभ किया।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी चिदानंद मुनि महाराज ने संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत संस्कृति की वाहक और संस्कारों की जननी है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा भावों को जागृत करती है, सद्प्रेरणा प्रदान करती है तथा वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को मजबूत बनाती है। संस्कृत देवभाषा होने के साथ-साथ संगम, संयम और सदाचरण की भाषा भी है।

मुख्य अतिथि संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्कृत की विभिन्न प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वहीं, महापौर किरण जैसल ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार, संरक्षण और संवर्धन होता है।

उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के मुख्य समन्वयक प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार ने बताया कि विकासखंड और जनपद स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में प्रदेशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, कॉन्वेंट स्कूलों, पब्लिक स्कूलों, नवोदय विद्यालयों, केंद्रीय विद्यालयों, गुरुकुलों तथा संस्कृत विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों सहित 50 हजार से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 13 जनपदों से प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

प्रतियोगिता के प्रथम दिन कनिष्ठ वर्ग में संस्कृत समूह नृत्य, आशुभाषण, वाद-विवाद और समूहगान आयोजित किए गए। वहीं, वरिष्ठ वर्ग में संस्कृत नाटक, समूह नृत्य, आशुभाषण और वाद-विवाद सहित कुल आठ प्रतियोगिताएं संपन्न हुईं। विभिन्न स्पर्धाओं में विशेषज्ञों ने निर्णायक की भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. मूलचंद शुक्ल द्वारा रचित ‘कालिदास लघुत्रयी’ पुस्तक का मंचासीन अतिथियों ने विमोचन भी किया। आयोजन के संचालन की जिम्मेदारी उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के शोध अधिकारी एवं राज्य समन्वयक डॉ. हरीश चंद्र गुरुरानी ने निभाई। अतिथियों ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया।

इस अवसर पर हरिद्वार जनपद संयोजक डॉ. विजय कुमार त्यागी सहित विभिन्न शिक्षाविदों, अधिकारियों और संस्कृत प्रेमियों का विशेष सहयोग रहा। समाचार लिखे जाने तक राज्य स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिता की गतिविधियां जारी थीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!