देहरादून, 12 सितम्बर ।
उत्तराखंड की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कांग्रेस के दो महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से हटने की इच्छा जाहिर की। यह राजनीतिक घटनाक्रम उनके पूर्व OSD और करीबी सहयोगी चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद सामने आया है।
हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटना चाहते हैं। उनके इस कदम को कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम और पार्टी की राजनीतिक छवि से जोड़कर देखा जा रहा है।
‘राहुल गांधी की लड़ाई कमजोर नहीं होनी चाहिए’
रावत ने अपनी पोस्ट में संकेत दिया कि कांग्रेस नेतृत्व, विशेष रूप से राहुल गांधी, भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में उनके करीबी सहयोगी पर लगे आरोपों की वजह से पार्टी की इस मुहिम पर किसी तरह का सवाल नहीं उठना चाहिए। इसी नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी के तहत उन्होंने संगठन के महत्वपूर्ण पदों से हटने का फैसला सामने रखा है।
हालांकि, रावत ने चंदन सिंह जीना का बचाव भी किया। उन्होंने उन्हें मेहनती, सभ्य और विनम्र व्यक्ति बताते हुए कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया अथवा OMR शीट में गड़बड़ी के आरोप जांच में साबित होते हैं, तो उन्हें निश्चित रूप से शर्मिंदगी होगी। लेकिन फिलहाल वह लगाए गए आरोपों को सही मानने की स्थिति में नहीं हैं।
ED की कार्रवाई के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
ED की कार्रवाई के बाद हरीश रावत का यह फैसला उत्तराखंड कांग्रेस के लिए कई सवाल भी खड़े कर रहा है। एक तरफ रावत ने अपने पदों से हटकर पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी राजनीति की विश्वसनीयता को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर उनके फैसले से कांग्रेस के भीतर राजनीतिक चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है।
पूर्व मुख्यमंत्री जैसे वरिष्ठ नेता का संगठनात्मक पदों से हटने की इच्छा जताना सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम नहीं माना जा रहा। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है और संगठन में इसका क्या असर पड़ता है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।
उत्तराखंड कांग्रेस में बढ़ सकती है अंदरूनी हलचल
हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली और अनुभवी नेताओं में शामिल रहे हैं। उनके इस फैसले का असर केवल संगठनात्मक स्तर तक सीमित रहेगा या प्रदेश की राजनीति में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे, यह आने वाला समय बताएगा।
फिलहाल ED की कार्रवाई, चंदन सिंह जीना पर लगे आरोप और हरीश रावत के इस्तीफे की घोषणा ने उत्तराखंड कांग्रेस के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा, कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया और रावत के अगले राजनीतिक कदम पर प्रदेश की सियासत की नजर रहेगी।