8 हजार से अधिक लोगों ने दिखाई एकजुटता, यूजीसी एक्ट, एससी-एसटी कानून और आरक्षण व्यवस्था को लेकर बुलंद हुई आवाज; टोल प्लाजा पर ज्ञापन देने को लेकर अड़े प्रदर्शनकारी, प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर लिया ज्ञापन…
हरिद्वार, 07 सितंबर 2026।
रविवार को हरिद्वार में बारिश भी लोगों के कदम नहीं थाम सकी। आसमान से लगातार बरसती बूंदों के बीच बहादराबाद में स्वर्ण समाज की ओर से आयोजित आंदोलन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। देखते ही देखते आंदोलन ने महाआंदोलन का रूप ले लिया और आयोजकों के अनुसार 8 हजार से अधिक लोगों ने इसमें भागीदारी की। बारिश के बावजूद लोगों के उत्साह और एकजुटता में कोई कमी नजर नहीं आई।
यूजीसी की नीतियों, आरक्षण व्यवस्था तथा सामाजिक एवं संवैधानिक विषयों को लेकर बहादराबाद स्थित Hotel Grand Lajja के ग्राउंड में विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। जनसभा में हरिद्वार जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए सवर्ण समाज के हजारों लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और शहर के कई गणमान्य लोग शामिल हुए।



कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शेर सिंह राणा रहे, जबकि अध्यक्षता सीतापुर निवासी बलवंत सिंह चौहान ने की। मंच से वक्ताओं ने यूजीसी से संबंधित नियमों, आरक्षण व्यवस्था और अन्य मांगों को लेकर अपनी बात रखते हुए सरकार से गंभीरता से विचार करने तथा सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
समानता, न्याय और सामाजिक समरसता के लिए आंदोलन : शेर सिंह राणा
मुख्य अतिथि शेर सिंह राणा ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक जाति या वर्ग के खिलाफ अथवा किसी वर्ग के पक्ष में नहीं, बल्कि समानता, न्याय और सामाजिक समरसता के लिए है। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था का प्रभाव विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है, इसलिए सरकार को इन विषयों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने यूजीसी से संबंधित नियमों की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में प्रतिभा और योग्यता को उचित अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज संविधान का सम्मान करता है, लेकिन संविधान और कानूनों में किए गए ऐसे बदलावों पर सवाल उठाना भी लोकतांत्रिक अधिकार है, जिनसे आम लोगों में असंतोष पैदा हो रहा है।
उन्होंने समाज के लोगों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आह्वान किया।
तीन प्रमुख मांगों को लेकर बुलंद हुई आवाज
आंदोलनकारियों ने मुख्य रूप से यूजीसी एक्ट वापस लेने, एससी-एसटी कानून में बदलाव/वापसी तथा आरक्षण व्यवस्था में सुधार एवं संशोधन की मांग उठाई। इसके साथ ही ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक आधार को प्रमुखता देने तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने सहित अन्य मांगें भी रखी गईं।



प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें सभी वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सके।
जनसभा के बाद टोल प्लाजा की ओर कूच
जनसभा समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए बहादराबाद टोल प्लाजा की ओर कूच कर गए। प्रदर्शनकारियों ने टोल प्लाजा पर पहुंचकर जिलाधिकारी को मौके पर बुलाकर ज्ञापन सौंपने की मांग रखी।
ज्ञापन देने को लेकर प्रदर्शनकारी वहीं बैठ गए और अपनी मांग पर अड़े रहे। इस दौरान कुछ समय के लिए पुलिस-प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच आमना-सामना होने से स्थिति तनावपूर्ण नजर आई, लेकिन प्रशासन और आंदोलनकारियों की समझदारी से मामला किसी विवाद में नहीं बदला और प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहा।
बाद में उपजिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि ज्ञापन को जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति तक पहुंचाया जाए।
टोल प्लाजा पर लगा जाम, वाहनों की लंबी कतारें
बड़ी संख्या में लोगों के टोल प्लाजा पर पहुंचने के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। टोल प्लाजा के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।


आंदोलन को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है तथा वे अपनी मांगों को इसी तरीके से सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए स्वामी श्री महामंदेश्वर आनंद स्वरूप जी महाराज ने कहा कि जब तक यूजीसी एक्ट को लेकर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, एससी-एसटी कानून में आवश्यक बदलाव नहीं किए जाते और आरक्षण व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था को लेकर समाज के एक हिस्से में लंबे समय से असंतोष है और अब इस विषय को लेकर देशभर में शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने आंदोलन को सड़क से लेकर संसद तक ले जाने की बात कहते हुए प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।
केंद्र सरकार पर समाज को बांटने का आरोप
स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने केंद्र सरकार पर विभिन्न मुद्दों के नाम पर समाज को बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब कोई संन्यासी जनता की मांगों को लेकर सड़क पर उतरता है तो सरकार को उसकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज की मांगों को दबाने के बजाय सरकार को संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग का विरोध करना नहीं, बल्कि अपनी मांगों और आशंकाओं को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाना है।
यूजीसी प्रावधानों को लेकर जताई आपत्ति
आंदोलनकारियों ने यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 के प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इन प्रावधानों को लेकर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों और अभिभावकों में कई आशंकाएं हैं।
उन्होंने सरकार से नियमों की व्यापक समीक्षा करने और सभी पक्षों से संवाद के बाद ऐसा समाधान निकालने की मांग की, जिससे किसी भी वर्ग के विद्यार्थियों में असुरक्षा की भावना पैदा न हो। वक्ताओं ने शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
चुनाव में वोट की चोट की चेतावनी
आंदोलन के दौरान वक्ताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने आगामी चुनावों में भाजपा और कांग्रेस को समर्थन नहीं देने तथा जनता के हित में सामने आने वाले तीसरे विकल्प पर विचार करने की बात कही।
आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि सवर्ण समाज की शंकाओं का समाधान नहीं किया गया और यूजीसी से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो आने वाले चुनावों में समाज अपने मताधिकार के माध्यम से जवाब देगा।
बारिश में भी कायम रहा जोश
छह सितंबर के इस आंदोलन की सबसे खास तस्वीर यह रही कि बारिश भी लोगों के कदम नहीं रोक सकी। खराब मौसम के बावजूद हजारों लोग कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे और घंटों तक आंदोलन में डटे रहे। बारिश के बीच लोगों की मौजूदगी ने आयोजकों के अनुसार आंदोलन को महाआंदोलन का रूप दिया।
आंदोलनकारियों का कहना था कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोगों का पहुंचना उनकी मांगों को लेकर समाज की गंभीरता और एकजुटता को दर्शाता है।
ये प्रमुख लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में स्वामी श्री महामंदेश्वर आनंद स्वरूप जी महाराज, स्वामी कार्तिक गिरी महाराज, मुख्य अतिथि शेर सिंह राणा, बलवंत सिंह चौहान, क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष एवं प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह, रोबिन सिंह सभासद एवं पंजाबी महासभा के प्रतिनिधि, संजय शर्मा ब्राह्मण समाज प्रतिनिधि, डॉ. केपीएस चौहान, अध्यक्ष आदर्श चौहान मंच हरिद्वार, जिला पंचायत सदस्य प्रदीप चौहान, हिमांशु चौहान, चंदन चौहान, सुखपाल चौहान, ऋषिपाल चौहान, प्रधान विकास चौहान, प्रधान नीरज चौहान, हितेश चौहान समेत बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इसके अलावा विवेक चौहान, दीपक चौहान, बख्शी चौहान, अंशुल चौहान, अंकित चौहान, शिवनंदन चौहान, विशाल चौहान, प्रदुम चौहान, मोनित चौहान, अक्षय चौहान, अखिल चौहान, भूपेश जोशी, सतीश शर्मा, विशाल शर्मा, निशिकांत शुक्ला, मनोज शुक्ला, के. कौशिक, संजय शर्मा, विमलेश मिश्रा, शिव शंकर पांडेय, ऋषि शर्मा समेत बड़ी संख्या में आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
बारिश के बीच बहादराबाद में उमड़ी भीड़, टोल प्लाजा तक पहुंचा प्रदर्शन और प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन ने छह सितंबर के इस आंदोलन को क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बना दिया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से उनकी आवाज आगे भी बुलंद होती रहेगी।