रिपोर्ट: वायरल बयान पर उठे सवाल, सफाई के बाद भी चर्चा तेज…

ओडिशा, 15 अक्टूबर 2026।
ओडिशा के नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम से जुड़े एक कथित बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट और बयान में दावा किया जा रहा है कि उन्होंने भाजपा के पक्ष में वोट बढ़ाने को लेकर चिंता जताई थी। इस दावे के सामने आने के बाद बीजेडी और कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, बाद में राज्यपाल-नामित ने अपने बयान को गलत संदर्भ में पेश किए जाने की बात कही।

क्या है वायरल दावे का पूरा मामला?
वायरल पोस्ट के मुताबिक, 12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा छह नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई, जिनमें झारखंड से तीन बार सांसद रहे ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
दावे के अनुसार, रांची में समाचार एजेंसी PTI से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि वहां अनुसूचित जाति (SC) मोर्चे को सक्रिय करके भाजपा के पक्ष में वोट कैसे आएं, इसकी चिंता करेंगे। इस कथित बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे।

15 अक्टूबर को दी सफाई
वायरल दावे के अनुसार, 15 अक्टूबर को ANI से बातचीत में ब्रज मोहन राम ने इस बयान से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था। उन्होंने सभी के साथ मिलकर काम करने और दलीय राजनीति से ऊपर रहकर संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने की बात कही। साथ ही, उन्होंने अपनी पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि का उल्लेख भी किया, लेकिन किसी एक राजनीतिक दल के लिए काम करने से इनकार किया।

उनकी सफाई के बाद इस पूरे मामले में बयान और उसके संदर्भ को लेकर बहस और तेज हो गई है।

फैक्ट चेक में क्या निकला?
उपलब्ध विवरण के आधार पर वायरल दावा आंशिक रूप से सही बताया जा रहा है, क्योंकि इसमें एक कथित बयान का उल्लेख है, जबकि बाद में संबंधित व्यक्ति ने उस बयान की व्याख्या पर आपत्ति जताते हुए सफाई दी।

हालांकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले PTI की मूल बातचीत, बयान का पूरा वीडियो और ANI को दिए गए स्पष्टीकरण की मूल रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। केवल वायरल स्क्रीनशॉट या अधूरे वीडियो के आधार पर पूरे मामले को निर्णायक रूप से सही या गलत नहीं ठहराया जा सकता।

संवैधानिक पद की निष्पक्षता पर सवाल
राज्यपाल का पद संवैधानिक मर्यादा, निष्पक्षता और सभी नागरिकों के प्रति समान व्यवहार की अपेक्षा करता है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक बयान को लेकर उठने वाले सवालों का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब सामने आना जरूरी है। वहीं, किसी बयान का मूल्यांकन उसके पूरे संदर्भ और प्रमाणित रिकॉर्डिंग के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

MH7 News की अपील: सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी राजनीतिक दावे को साझा करने से पहले उसके मूल स्रोत, पूरी रिकॉर्डिंग और विश्वसनीय समाचार रिपोर्टों की जांच अवश्य करें। तथ्य और आरोप के बीच अंतर समझना ही जिम्मेदार पत्रकारिता की पहचान है।

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