90-99 प्रतिशत अंक लाने वाले युवाओं को रोजगार नहीं मिलने का आरोप, जंतर-मंतर की अनुमति रद्द होने पर भी उठाए सवाल…
हरिद्वार, 24 अगस्त 2026।
यूजीसी के नवीन कानून और वर्तमान आरक्षण व्यवस्था के विरोध में रविवार को श्री अखंड परशुराम अखाड़ा की ओर से परशुराम घाट पर सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए महायज्ञ आयोजित किया गया। विद्वान पंडित विष्णु महाराज एवं कार्तिकेय महाराज के नेतृत्व में 11 ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ में आहुतियां दीं और सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।
अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों और वर्तमान आरक्षण व्यवस्था को लेकर समाज के एक वर्ग में गंभीर चिंता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेहनत और योग्यता के आधार पर 90, 92 और 99 प्रतिशत तक अंक हासिल करने वाले युवाओं को भी रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को अवसर मिल जाता है। उन्होंने कहा कि युवाओं की मांग किसी विशेष वर्ग को लाभ पहुंचाने की नहीं, बल्कि भर्ती एवं अवसरों की व्यवस्था में सुधार की है।
पंडित कौशिक ने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखते हुए युवाओं को समान और न्यायपूर्ण अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि परशुराम घाट पर आयोजित बुद्धि-शुद्धि महायज्ञ किसी जाति अथवा वर्ग के विरोध में नहीं है, बल्कि योग्यता, समानता और युवाओं के भविष्य की चिंता को लेकर किया गया है।
जंतर-मंतर की अनुमति रद्द होने पर उठाए सवाल
कार्यक्रम के दौरान वक्ता ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति रद्द किए जाने को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अनुमति दी गई थी, तो बाद में उसे किसके कहने पर रद्द किया गया, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान बच्चों पर लाइटिंग किए जाने के आरोपों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए और भर्ती व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
पीएम और गृह मंत्री से न्यायपूर्ण व्यवस्था की अपील
अधीर कौशिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने मां काली से प्रार्थना की है कि देश के नेतृत्व का मन गंगा जल की तरह पवित्र रहे और समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ न्याय हो। उन्होंने कहा कि सरकार का संदेश ‘एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे’ है, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि समाज में किसी वर्ग के प्रति भेदभाव या दूरी की भावना पैदा न हो।
उन्होंने कहा कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए। समाज को अलग-अलग बिरादरियों में बांटने की कोशिश उचित नहीं है। यदि समाज के बीच खाई पैदा हो गई तो उसे भरने में लंबा समय लग सकता है।
यूजीसी के कथित ‘काले कानून’ को वापस लेने की मांग
वक्ता ने संविधान को सर्वोपरि बताते हुए यूजीसी से संबंधित कथित ‘काले कानून’ को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार को नई नीतियां बनाते समय युवाओं की योग्यता, रोजगार और भविष्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने समाज के उन नेताओं से भी युवाओं के साथ खड़े होने की अपील की, जो इस मुद्दे पर मौन हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज के नेता अपने लोगों की आवाज नहीं उठाएंगे तो आने वाले समय में समाज उनसे भी सवाल करेगा।
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते यूजीसी के नए नियमों और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े सवालों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो ब्राह्मण समाज चरणबद्ध तरीके से बड़े आंदोलन की राह अपना सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय संवाद के माध्यम से युवाओं और समाज की चिंताओं का समाधान करना चाहिए।
महायज्ञ के समापन पर मां काली और मां गंगा से देश, समाज और नेतृत्व को सद्बुद्धि प्रदान करने तथा सभी वर्गों के हित में निर्णय लिए जाने की प्रार्थना की गई। कार्यक्रम का समापन ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ हुआ।
इस अवसर पर ब्राह्मण जागृति संस्थान के संजय भाई, दीपक भारद्वाज,राज तिवारी, इंद्रपाल शर्मा, हरि नारायण त्रिपाठी, विशाल शर्मा, कीर्ति कुमार, निखिल शर्मा, ऋषि शर्मा, बृजमोहन शर्मा, मनोज ठाकुर, कुलदीप शर्मा और रविकांत शर्मा सहित बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग मौजूद रहे।