सुरक्षा और न्याय के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने का दावा, दो मासूम बच्चों को लेकर जिलाधिकारी को सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन…
हरिद्वार, 10 सितंबर 2026।
जनपद हरिद्वार के थाना पथरी क्षेत्र के पदार्था गांव से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। कथित रूप से लंबे समय से न्याय और सुरक्षा की मांग कर रही एक पीड़ित महिला ने अब राष्ट्रपति से अपने और अपने दो मासूम बच्चों के लिए इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई है। महिला ने हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित को राष्ट्रपति के नाम संबोधित प्रार्थना पत्र सौंपकर अपनी पीड़ा और न्याय न मिलने की शिकायत सामने रखी है।
पीड़िता का आरोप है कि पिछले करीब दो वर्षों से वह गांव के कुछ लोगों के कथित उत्पीड़न और धमकियों से परेशान है तथा मामले में कार्रवाई और सुरक्षा की मांग को लेकर लगातार संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाती रही है। महिला के अनुसार, बार-बार शिकायत करने के बावजूद उसे अपेक्षित न्याय नहीं मिल सका, जिसके चलते वह मानसिक रूप से बेहद परेशान और असहाय महसूस कर रही है।
प्लॉट दिलाने के नाम पर ढाई लाख रुपये लेने का आरोप
पीड़िता ने अपने प्रार्थना पत्र में गांव निवासी जावेद पर प्लॉट दिलाने के नाम पर उससे करीब ढाई लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। महिला के मुताबिक, जब उसने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो मामला पुलिस चौकी तक पहुंचा। इसके बाद कथित तौर पर जावेद ने एक लाख रुपये वापस किए और शेष राशि बाद में लौटाने का आश्वासन देते हुए समझौता किया।
महिला का आरोप है कि इसके बाद विवाद और बढ़ गया तथा गांव के ही महबूब अली और एहसान समेत कुछ लोगों द्वारा उसे लगातार परेशान और भयभीत किया जाने लगा। पीड़िता ने अपने पत्र में अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएं भी व्यक्त की हैं।
रात में घर पहुंचकर धमकाने का लगाया आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया कि एक रात कुछ लोग उसके घर पहुंचे और उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। महिला के अनुसार, घटना के समय वह घर पर अकेली थी, जिसके कारण वह बुरी तरह भयभीत हो गई। उसने इस संबंध में मदद और सुरक्षा के लिए उत्तराखंड जनकल्याण समिति से संपर्क किया।
समिति की ओर से मामले को पुलिस के संज्ञान में लाने और पीड़िता को न्याय दिलाने का प्रयास किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, पीड़िता का दावा है कि उसकी शिकायत के बावजूद उसे अब तक वह कार्रवाई और सुरक्षा नहीं मिल सकी जिसकी वह अपेक्षा कर रही थी।
दो साल से न्याय की गुहार, अब राष्ट्रपति से अपील
पीड़िता का कहना है कि वह करीब दो वर्षों से अपनी शिकायत लेकर अलग-अलग स्तरों पर अधिकारियों के समक्ष जा रही है। उसका आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद उसकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसी कथित उपेक्षा से निराश होकर उसने अब राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए इच्छा मृत्यु की अनुमति की मांग की है।
महिला ने अपने दो मासूम बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उसका कहना है कि जब उसे लगातार खतरा महसूस हो और न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़े, तो ऐसी स्थिति में वह स्वयं को बेहद असहाय महसूस कर रही है।
मामले की निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग
इस पूरे मामले ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई और पीड़िता तथा उसके बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा।
वहीं, पीड़िता की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। ऐसे संवेदनशील प्रकरण में निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी स्तर से राष्ट्रपति के नाम दिए गए इस प्रार्थना पत्र पर क्या कार्रवाई होती है और क्या लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रही इस महिला को आखिरकार सुरक्षा और न्याय मिल पाता है।
जनहित का सवाल यह है कि यदि कोई महिला लगातार अपनी सुरक्षा और न्याय की गुहार लगा रही है, तो उसकी शिकायत पर समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी क्यों न हो?