राज्यभर में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की होगी जांच, 169 सेंसर और 112 सायरन परखी जाएगी व्यवस्था; मोबाइल पर भी आएगा अलर्ट
देहरादून, 08 अक्टूबर 2026।
उत्तराखंड में भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए कल 9 अक्टूबर को सुबह ठीक 11 बजे राज्यभर में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली का परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में अचानक सायरन बज सकता है। साथ ही मोबाइल फोन पर अलर्ट, वाइब्रेशन और बीप-बीप की आवाज भी सुनाई दे सकती है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि टेस्ट के दौरान बजने वाला सायरन किसी वास्तविक भूकम्प का संकेत नहीं होगा। लोगों से अपील की गई है कि सायरन या मोबाइल अलर्ट मिलने पर घबराएं नहीं और किसी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें।
🔊 क्यों किया जा रहा है सायरन का परीक्षण?
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य लोगों को भूकम्प चेतावनी सायरन की आवाज से परिचित कराना और यह जांचना है कि आपदा की स्थिति में चेतावनी प्रणाली कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से काम करती है।
टेस्ट के दौरान यह देखा जाएगा कि सेंसर से प्राप्त सूचना के बाद चेतावनी तंत्र सक्रिय हो रहा है या नहीं और सायरन के माध्यम से लोगों तक संदेश समय पर पहुंच रहा है या नहीं। यदि किसी स्थान पर तकनीकी समस्या सामने आती है तो उसे दूर करने की कार्रवाई की जाएगी।
📡 169 सेंसर और 112 सायरन की होगी जांच
उत्तराखंड में वर्तमान में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत 169 सेंसर और 112 सायरन लगाए गए हैं। राज्यभर में होने वाले इस परीक्षण में इन उपकरणों की कार्यप्रणाली को परखा जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य भूकम्प की स्थिति में संभावित झटकों से पहले लोगों को चेतावनी उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाने और आवश्यक सावधानी बरतने के लिए कुछ समय मिल सके।
📱 मोबाइल पर भी आएगा अलर्ट
सिर्फ सायरन ही नहीं, बल्कि ‘भूदेव’ मोबाइल ऐप के माध्यम से भी परीक्षण चेतावनी जारी की जाएगी। ऐप इस्तेमाल करने वाले लोगों को मोबाइल पर चेतावनी संदेश के साथ वाइब्रेशन और बीप-बीप की आवाज सुनाई दे सकती है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने मोबाइल में भूदेव ऐप का अपडेटेड वर्जन रखें और ऐप को आवश्यक लोकेशन अनुमति प्रदान करें, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में चेतावनी समय पर प्राप्त हो सके।
🚨 आगे और मजबूत होगी चेतावनी प्रणाली
सरकार भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली को आने वाले समय में और मजबूत करने की तैयारी में है। योजना के तहत सेंसर और सायरन की संख्या को करीब दोगुना करने तथा इन्हें लगभग 5 से 10 किलोमीटर के अंतराल पर स्थापित करने का प्रस्ताव है।
यूएसडीएमए और आईआईटी रुड़की के सहयोग से अतिरिक्त सेंसर लगाए जाने का प्रस्ताव भी प्रक्रिया में है। इससे राज्य के अधिक से अधिक क्षेत्रों को भूकम्प पूर्व चेतावनी नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।
📅 हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे होगा टेस्ट
यूएसडीएमए की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे सायरन का परीक्षण किया जाएगा। इसलिए भविष्य में भी इस समय सायरन सुनाई देने पर लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं होगी।
प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे अपने परिवार के बच्चों, बुजुर्गों और आसपास के लोगों को भी इस परीक्षण की जानकारी दें, ताकि सायरन सुनकर किसी प्रकार की अफरातफरी या भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
🏠 भूकम्प के दौरान जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
प्रशासन ने लोगों से भूकम्प के दौरान सुरक्षित व्यवहार की जानकारी हासिल करने और समय-समय पर आयोजित होने वाली मॉक ड्रिल में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की है। आपदा के समय घबराने के बजाय सही जानकारी और सुरक्षित व्यवहार अपनाना बेहद महत्वपूर्ण है।
याद रखें—कल सुबह 11 बजे बजने वाला सायरन खतरे की घंटी नहीं, बल्कि खतरे से निपटने की तैयारी का हिस्सा है।
📢 खास अपील
कल सुबह 11 बजे सायरन की आवाज सुनें, उसे पहचानें, मोबाइल अलर्ट पर ध्यान दें और दूसरों को भी जागरूक करें।
सायरन डराने के लिए नहीं, बचाने की तैयारी के लिए है।