15 अप्रैल 2026
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर के कुलपति की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद कुलपति की नियुक्ति को वैध ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता प्रो. नवीन प्रकाश नौटियाल ने याचिका में आरोप लगाया था कि कुलपति की नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के विनियम, 2018 तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के विरुद्ध की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित पात्रता शर्तों का उल्लंघन हुआ है और प्रो. श्री प्रकाश सिंह की नियुक्ति मनमानी एवं अवैध है।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि इस तरह की नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन करती हैं और मेरिट-आधारित चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्रभावित करती हैं।
हालांकि, कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पाया कि कुलपति की नियुक्ति यूजीसी और केंद्रीय विश्वविद्यालय के नियमों के अनुरूप की गई है। इसी आधार पर खंडपीठ ने जनहित याचिका को खारिज कर दिया।
इस फैसले के साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन को बड़ी राहत मिली है और कुलपति की नियुक्ति पर उठ रहे विवाद पर विराम लग गया है।