उत्तराखंड में सरकारी नौकरी की चाहत रखने वाले बेरोजगार युवाओं के सपने नकल माफिया चूर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं और भर्ती परीक्षा सवालों में घिरी रही हैं। मामला चाहे उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का रहा हो या उत्तराखंड लोक सेवा आयोग का वर्ष-2022 में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के बदनाम होने के बाद सरकार ने जनवरी-2023 में होने वाली लेखपाल भर्ती परीक्षा की जिम्मेदारी लोक सेवा आयोग को दी थी, लेकिन वह भी नकल की जद में आ गई थी हैरानी वाली बात यह थी कि नकल माफिया के अतिरिक्त इन परीक्षाओं में हुई धांधली में आयोगों के ही कुछ अधिकारियों का काला चेहरा सामने आया। अब शनिवार को एक बार फिर नकल माफिया हाकम की गिरफ्तारी के बाद भर्ती परीक्षाओं की शुचिता पर सवाल उठने लगे हैं

प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं में धांधली का इतिहास यूं तो पुराना रहा है, लेकिन इसका सबसे बड़ा जिन्न उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से मई से दिसंबर-2021 के बीच आयोजित तीनों भर्ती परीक्षाओं में नकल के रूप में सामने आया था सेवा चयन आयोग ने 13 सरकारी विभागों के लिए समूह ग-स्नातक स्तर के 916 पदों, सचिवालय रक्षक के 33 पद और वन दारोगा के 316 पदों के लिए परीक्षा कराई थी, जिनमें कुल दो लाख 26 हजार 388 अभ्यर्थी शामिल हुए थे तीनों परीक्षाओं के परिणाम भी जारी हुए और सफल अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच कर उन्हें नियुक्तियां भी मिल गईं, लेकिन बाद में पता चला कि इन परीक्षाओं में पेपर लीक व नकल कराई गई थी। इसके बाद भेद खुलते चलते गए और न केवल वर्ष-2021, बल्कि वर्ष 2016 में हुई परीक्षा को भी सवालों में ला दिया था

By mh7news

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