जिले की अधिकांश थाना-कोतवालियों में प्रभारियों की कुर्सी हिलने के बाद अब विवेचनाओं में सुस्ती बरतने वाले दारोगाओं पर भी नकेल कसने की तैयारी शुरू हो गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोबाल ने सभी भी सर्किल आफिसरों से सुस्त दरोगाओं की सूची तलब की है, ताकि उन पर विभागीय शिकंजा कसा जा सके। सूची तैयार होने के बाद उन पर कार्रवाई होगी विवेचना की रफ्तार धीमी होने का असर न्याय प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है। चार्जशीट में हो रही देरी से पीड़ित पक्ष महीनों तक न्याय की राह तकता रहता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में वरिष्ठ अधिकारियों तक लगातार ऐसी शिकायतें पहुंची हैं कि विवेचकों ने कई मामलों में महीनों बीत जाने के बावजूद चार्जशीट दाखिल नहीं की

परिणामस्वरूप न केवल अदालत की कार्यवाही अटक गई, बल्कि पीड़ित पक्ष को अनावश्यक मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ी। दो दिन पहले वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोबाल ने विवेचनाओं की समीक्षा बैठक बुलाते हुए सभी राजपत्रित अधिकारियों से सुस्त दारोगाओं के नाम की सूची मांगी है सूत्र बताते हैं कि जिले में 20 से ज्यादा दारोगा इस सूची में शामिल होने के बाद कार्रवाई की जद में आने तय हैं। बैठक में एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने साफ किया है कि विवेचना में ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी चार्जशीट समय पर दाखिल करना पुलिस की सबसे अहम जिम्मेदारी है। इसमें देरी का सीधा मतलब है पीड़ित को न्याय मिलने में विलंब। इसलिए सुस्त रवैया अपनाने वाले अफसरों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी

खबर सोर्स (जागरण)

By mh7news

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