लालकुआं,5November ।
दीपावली के पर्व पर वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी की आशंका को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। खासतौर पर उल्लुओं की सुरक्षा को लेकर विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। तराई पूर्वी वन प्रभाग की डॉली रेंज में संवेदनशील वन क्षेत्रों में दिन-रात गश्त की जा रही है। वहीं, वन चौकियों और चेक पोस्टों पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
दरअसल, दीपावली के दौरान अंधविश्वास और कथित तांत्रिक क्रियाओं के नाम पर उल्लुओं के शिकार एवं अवैध तस्करी की आशंका बढ़ जाती है। हिंदू मान्यताओं में उल्लू को माता लक्ष्मी का वाहन माना जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि इसी धार्मिक आस्था और अंधविश्वास की आड़ में कुछ लोग इस संरक्षित वन्यजीव को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं।
मामले में डॉली रेंज के वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप कुमार पंत ने बताया कि सर्दियों की शुरुआत और त्योहारों के मौसम में वन्यजीवों के शिकार की आशंका बढ़ जाती है। इसे गंभीरता से लेते हुए पूरे वन क्षेत्र में सघन निगरानी और चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि स्थानीय क्षेत्र में उल्लुओं की संख्या भले ही कम है, लेकिन वन्यजीवों की सुरक्षा विभाग की प्राथमिकता है। उल्लुओं सहित अन्य वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी को रोकने के लिए वनकर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
वन क्षेत्राधिकारी ने यह भी बताया कि दीपावली के दौरान लकड़ी तस्कर भी सक्रिय होने की कोशिश करते हैं। ऐसे में अवैध कटान और लकड़ी की तस्करी पर रोक लगाने के लिए सभी वन चौकियों एवं चेक पोस्टों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
वन विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि जंगलों में अवैध प्रवेश, वन संपदा की चोरी और वन्यजीवों के शिकार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर, दीपावली पर जहां घर-आंगन रोशनी से जगमगाएंगे, वहीं कुमाऊं के जंगलों में वन विभाग की पैनी नजर वन्यजीवों की सुरक्षा पर रहेगी। विभाग का प्रयास है कि त्योहार की खुशियों के बीच किसी बेजुबान वन्यजीव की जान अंधविश्वास या लालच की भेंट न चढ़े।
MH7 NEWS | उत्तराखंड | नैनीताल (लालकुआं