हरिद्वार में गरमाया कमल दास कुटिया आश्रम का मामला, बकाया किराया और कब्जा खाली कराने की मांग; मांग पूरी नहीं हुई तो आमरण अनशन की चेतावनी…
हरिद्वार, 24 सितंबर।
ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व रखने वाले श्री कमल दास कुटिया आश्रम की संपत्ति को लेकर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। आश्रम ट्रस्ट ने यातायात पुलिस विभाग पर पिछले 29 वर्षों से किराया बकाया होने का दावा करते हुए मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ट्रस्ट की ओर से मुख्यमंत्री सहित संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप की अपील की गई है।
1988 में लगभग 100 कमरे किराये पर दिए जाने का दावा
ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी श्री प्रकाश शास्त्री जी महाराज के अनुसार, वर्ष 1988 में सहारनपुर के दिशा-निर्देशों के तहत किरायानामा तैयार कर आश्रम के लगभग 100 कमरे यातायात पुलिस को दिए गए थे। ट्रस्ट का कहना है कि वर्ष 1997 तक किराया नियमित रूप से प्राप्त होता रहा, लेकिन इसके बाद वर्ष 1997 से 2026 तक करीब 29 वर्षों से किराया नहीं मिला है।


ट्रस्ट का दावा है कि इतने लंबे समय से किराया न मिलने के कारण बड़ी धनराशि बकाया हो चुकी है। ट्रस्ट ने बकाया किराये का निष्पक्ष आकलन कर भुगतान कराने तथा आश्रम की संपत्ति को कब्जामुक्त कराने की मांग की है।
हाईकोर्ट के आदेश के पालन का भी उठाया मुद्दा
प्रेसवार्ता के दौरान ट्रस्ट की ओर से वर्ष 2016 में हाईकोर्ट की ओर से जारी नोटिस/आदेश का भी हवाला दिया गया। ट्रस्ट का दावा है कि इसके बावजूद किराये के भुगतान और संपत्ति खाली कराने के मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
हालांकि, इन दावों और न्यायालय संबंधी विवरणों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित न्यायिक अभिलेखों एवं विभागीय रिकॉर्ड से की जानी शेष है।
118 साल पुरानी संपत्ति की जर्जर हालत पर चिंता
ट्रस्ट ने आश्रम की संपत्ति को लगभग 118 वर्ष पुरानी बताते हुए भवन की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। ट्रस्ट के अनुसार भवन का एक बड़ा हिस्सा जर्जर हो चुका है और ऐसी स्थिति में वहां रहने या आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर जोखिम बना हुआ है।
ट्रस्ट ने प्रशासन से भवन की तत्काल तकनीकी एवं सुरक्षा जांच कराने की मांग की है, ताकि किसी संभावित दुर्घटना की आशंका को समय रहते दूर किया जा सके।


कई स्तरों पर गुहार, अब 15 दिन का अल्टीमेटम
श्री प्रकाश शास्त्री जी महाराज ने बताया कि मामले को लेकर भाजपा, सपा, डीआईजी समेत विभिन्न स्तरों के अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी जा चुकी है। ट्रस्ट का कहना है कि लंबे समय से मांग उठाए जाने के बावजूद समाधान नहीं निकल पाया।
अब प्रेसवार्ता के माध्यम से ट्रस्ट ने 15 दिन की समय-सीमा तय की है। स्वामी जी ने कहा कि यदि इस अवधि में बकाया किराये, कमरों को खाली कराने और अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो वे आमरण अनशन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।
अर्धकुंभ से पहले समाधान की मांग
ट्रस्ट ने अर्धकुंभ से पहले आश्रम की संपत्ति को कब्जामुक्त कराने, बकाया किराये का भुगतान सुनिश्चित कराने और जर्जर भवन की तकनीकी जांच कराने की मांग दोहराई है।
इस दौरान अजय गौतम, सत्यप्रकाश दास एवं पुजारी उमाकांत अवस्थी सहित ट्रस्ट से जुड़े लोग मौजूद रहे। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि वह मामले का समाधान प्रशासनिक एवं वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से चाहता है, लेकिन यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि 15 दिन की इस समय-सीमा के भीतर प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।