लालढांग, 16 सितम्बर ।
लालढांग क्षेत्र के रसूलपुर मीठीबेरी गांव में रवासन नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना लगातार दो महीने से जारी है। पुल निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन ने अब गंभीर रूप ले लिया है। हाल ही में रसूलपुर गांव के आर्यन नामक बच्चे की मृत्यु के बाद ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया, जिसके चलते पुल निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन और तेज हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि रवासन नदी पर पुल का अभाव लंबे समय से क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर गांवों का आवागमन प्रभावित होता है और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक, पुल का निर्माण होने से आसपास के गांवों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी तथा आपात स्थिति में मरीजों, बच्चों, बुजुर्गों और अन्य जरूरतमंदों को समय पर मदद मिल पाएगी।
अधिकारियों ने धरना स्थल पर पहुंचकर सुनी ग्रामीणों की पीड़ा
मंगलवार को प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनरत ग्रामीणों से बातचीत की। हरिद्वार के एसडीएम योगेश मेहरा, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता योगेश चौहान तथा सीओ शिशुपाल नेगी ग्रामीणों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं।

अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल्द पुल निर्माण की दिशा में कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया। अधिकारियों के धरना स्थल पर पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने अपनी मांगों और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को विस्तार से उनके सामने रखा।

आर्यन की मौत के बाद ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश
पुल निर्माण की मांग को लेकर पहले से चल रहे आंदोलन के बीच रसूलपुर गांव के बच्चे आर्यन की मृत्यु ने ग्रामीणों को झकझोर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों का कहना है कि अब पुल निर्माण केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पुल निर्माण की प्रक्रिया को केवल आश्वासन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे धरातल पर उतारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे हैं और जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
महिलाओं, बुजुर्गों और जनप्रतिनिधियों की भी रही मौजूदगी
धरना स्थल पर मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। इनमें महिलाएं, बुजुर्ग और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी शामिल रहे। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य पोखरियाल , ग्राम पंचायत रसूलपुर के प्रधान कमलेश द्विवेदी तथा जसवीर सिंह सहित कई ग्रामीणों ने अपनी बात रखी।
ग्रामीणों की एकजुटता से साफ है कि रवासन नदी पर पुल निर्माण की मांग अब पूरे क्षेत्र की सामूहिक आवाज बन चुकी है। प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर रहेगी कि पुल निर्माण को लेकर आगे क्या ठोस कार्रवाई होती है।
आश्वासन के बाद बढ़ी उम्मीदें, अब कार्रवाई का इंतजार
दो महीने से चल रहे अनिश्चितकालीन धरने और लगातार उठ रही ग्रामीणों की आवाज के बीच अधिकारियों का धरना स्थल पर पहुंचना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद पुल निर्माण की दिशा में जल्द ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रवासन नदी पर पुल निर्माण का वर्षों पुराना सपना कब हकीकत में बदलेगा? ग्रामीणों का संघर्ष और प्रशासन का आश्वासन अब उस मुकाम पर पहुंच चुका है, जहां लोगों की निगाहें केवल घोषणा पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।