हरिद्वार, 13 सितंबर।
आस्था, संस्कृति और कला के अनूठे संगम के लिए तैयार हो जाइए। श्री गणेश उत्सव समिति, सेक्टर-3 भेल, हरिद्वार की ओर से आयोजित 22वें श्री गणपति महोत्सव में इस बार ‘भेल के राजा’ के दरबार में संस्कृति का भव्य रंगमंच सजेगा। महोत्सव की सांस्कृतिक संध्याओं में हरिद्वार क्षेत्र के करीब 380 कलाकार, कलागुरु और कोरियोग्राफर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर शहरवासियों को मंत्रमुग्ध करेंगे।
14 और 16 सितंबर को रामलीला मैदान, सेक्टर-3 भेल में होने वाली सांस्कृतिक संध्याओं में समूह नृत्य, गायन और आकर्षक झांकियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपराओं और कला के विविध रंग देखने को मिलेंगे। आयोजन की खास बात यह रहेगी कि मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले कलाकारों के साथ उनके कला गुरुओं के योगदान को भी सम्मान दिया जाएगा। समिति की ओर से सभी प्रतिभागियों को ‘संस्कृति सेवा सम्मान’ प्रदान किया जाएगा।
14 सितंबर को होगा ‘भेल के राजा’ का भव्य आगमन
समिति के अध्यक्ष प्रवीण कुमार बरदिया एवं सचिव विनीत कुमार चौहान ने बताया कि 22वें गणपति महोत्सव का शुभारंभ 14 सितंबर को सुबह 11 बजे ‘भेल के राजा’ की भव्य मूर्ति स्थापना के साथ होगा। मूर्ति स्थापना भेल के कार्यपालक निदेशक रंजन कुमार के कर-कमलों से संपन्न होगी।
इस अवसर पर भेल के अधिकारियों के साथ विभिन्न यूनियनों एवं एसोसिएशनों के पदाधिकारियों तथा धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रहेगी। महोत्सव को भव्य स्वरूप देने के लिए समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं।
380 कलाकारों को एक मंच पर लाना बड़ी पहल
समिति अध्यक्ष प्रवीण कुमार बरदिया ने कहा कि हरिद्वार के अलग-अलग क्षेत्रों से करीब 380 कलाकारों, कलागुरुओं और कोरियोग्राफरों को एक मंच पर लाना अपने आप में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य केवल गणपति उत्सव मनाना नहीं, बल्कि स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को मंच देना और उन्हें सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाना भी है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भव्य स्वरूप देने में समिति की सांस्कृतिक टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संतोष कुमार साहू, सोनू तोलंबिया, राकेश रोशन, रविंद्र यादव, नेत्रपाल, अरुण पाठक और अंशुल गुरव सहित पूरी सांस्कृतिक टीम कलाकारों के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर रही है।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
सचिव विनीत कुमार चौहान ने कहा कि श्री गणपति महोत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कला, संस्कृति, प्रतिभा और सामाजिक एकता का उत्सव है। समिति का प्रयास है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और भारतीय संस्कृति से जुड़ी रहे तथा स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध हो।
उन्होंने कहा कि शहरवासियों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से महोत्सव को लगातार भव्य स्वरूप मिल रहा है। इस बार बड़ी संख्या में कलाकारों की भागीदारी से आयोजन में सांस्कृतिक विविधता देखने को मिलेगी।
कुल मिलाकर, ‘भेल के राजा’ के दरबार में इस बार गणपति भक्ति के साथ नृत्य, संगीत, कला और भारतीय संस्कृति की ऐसी छटा देखने को मिलेगी, जो हरिद्वारवासियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने वाली है।