झुग्गी-झोपड़ी में गुजर-बसर करने वाले परिवारों के हाथों में आई पक्के घर की चाबी, संस्था ने बैरागी कैंप के 50 से अधिक परिवारों को आवास दिलाने का रखा लक्ष्य…
हरिद्वार, 13 सितंबर।
कहते हैं कि इंसानियत की असली पहचान उस समय होती है, जब कोई व्यक्ति या संस्था बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों के जीवन में बदलाव लाने के लिए आगे आए। हरिद्वार में सामाजिक संस्था ‘निस्वार्थ कदम’ ने इसी भावना को साकार करते हुए 13 अति-गरीब और बेघर परिवारों को उनके अपने आशियाने की सौगात दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बैरागी कैंप स्थित बंजारी वाला क्षेत्र में लंबे समय से झुग्गी-झोपड़ियों में कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे इन परिवारों के लिए पक्के मकान की चाबी मिलना किसी सपने के सच होने से कम नहीं रहा। वर्षों से अस्थायी ठिकानों में रहने वाले परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आनेकी-हेतमपुर, हरिद्वार में निर्मित पक्के फ्लैटों की चाबियां सौंपी गईं।
50 से अधिक परिवारों को आवास दिलाने का लक्ष्य
प्रेस वार्ता के दौरान निस्वार्थ कदम संस्था के वरिष्ठ सदस्य रोहित वर्मा ने बताया कि संस्था का उद्देश्य केवल 13 परिवारों तक सीमित नहीं है। संस्था बैरागी कैंप क्षेत्र में रहने वाले 50 से अधिक जरूरतमंद परिवारों को भी स्थायी आवास दिलाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि संस्था की कोशिश है कि जिन परिवारों के पास अपना कोई स्थायी आशियाना नहीं है, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाकर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराया जाए।
1BHK फ्लैट में मिलेंगी मूलभूत सुविधाएं
संस्था के अनुसार, आनेकी-हेतमपुर में जिन परिवारों को आवास उपलब्ध कराया गया है, वे 1BHK फ्लैट हैं। इनमें एक कमरा, रसोई, लेट-बाथ और बालकनी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
संस्था की ओर से बताया गया कि इन परिवारों को केवल आवास उपलब्ध कराने तक ही प्रयास सीमित नहीं रखा गया, बल्कि गैस कनेक्शन, विद्युत कनेक्शन और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित कराने में भी सहयोग किया गया है। संस्था के अनुसार, गैस कनेक्शन प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत उपलब्ध कराया गया है।
चाबी हाथ में आते ही छलक उठीं आंखें
रविवार को बैरागी कैंप में आयोजित सादे लेकिन भावुक कार्यक्रम में परिवारों को आवास आवंटन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। जैसे ही लाभार्थियों के हाथों में उनके नए घर की चाबी पहुंची, कई महिलाओं की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
लाभार्थी परिवारों ने भावुक होकर संस्था के प्रयासों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने पूरी जिंदगी झोपड़ी में गुजार दी और कभी नहीं सोचा था कि उन्हें भी पक्का घर नसीब होगा। उनके लिए यह केवल मकान मिलने की बात नहीं, बल्कि बेहतर और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत है।
दिहाड़ी मजदूरी और छोटे कामों से चलता था परिवारों का गुजारा
बंजारी वाला क्षेत्र में रहने वाले 50 से अधिक परिवारों में से जिन 13 परिवारों को आवास मिला है, उनमें कई परिवार दिहाड़ी मजदूरी, गुब्बारे बेचने, रिक्शा चलाने और अन्य छोटे-मोटे कामों से अपना जीवनयापन करते रहे हैं।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इन परिवारों के पास न तो अपनी जमीन थी और न ही स्थायी आवास। संस्था के अनुसार, शासन के सर्वे में इन परिवारों को अति-गरीब श्रेणी में चिन्हित किया गया था। संस्था पिछले कई वर्षों से इन परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रही थी।
बच्चों की शिक्षा और महिलाओं के रोजगार पर भी रहेगा फोकस
निस्वार्थ कदम संस्था ने आगे की योजना भी स्पष्ट की है। संस्था के मुताबिक, बैरागी कैंप में बचे हुए जरूरतमंद परिवारों को चिन्हित कर उन्हें भी आवास उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
इसके साथ ही जिन 13 परिवारों को आवास मिला है, उनके बच्चों की शिक्षा और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी संस्था काम करेगी। इससे इन परिवारों को केवल पक्का घर ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिल सकेगा।
‘निस्वार्थ कदम’ के अन्य सामाजिक कार्य
निस्वार्थ कदम संस्था के पदाधिकारियों के अनुसार, संस्था लंबे समय से हरिद्वार सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक सेवा के कार्य कर रही है।
- शिक्षा के क्षेत्र में पहल
गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए संस्था द्वारा ‘शिक्षा का कदम’ नाम से निःशुल्क पाठशाला संचालित की जा रही है। संस्था के अनुसार यहां सैकड़ों बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ किताबें, कॉपियां और ड्रेस भी उपलब्ध कराई जाती हैं। - स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के घुड़दौर गांव में ‘मनु हेल्थ केयर’ के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क उपचार और दवाइयां उपलब्ध कराने का दावा संस्था ने किया है। इसके अलावा समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन भी किया जाता है। - ‘कोई भूखा न सोए’ अभियान
कोरोना काल के दौरान शुरू हुई ‘कोई भूखा न सोए’ मुहिम को आज भी जारी रखने की बात संस्था ने कही है। संस्था के अनुसार धार्मिक स्थलों, रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। - पर्यावरण और स्वच्छता अभियान
संस्था के अनुसार गंगा घाटों पर 50 से अधिक स्वच्छता अभियान चलाए जा चुके हैं, जबकि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से 2,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। - महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई-कढ़ाई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकारी योजना और सामाजिक प्रयास का संगम बना उम्मीद की किरण
13 परिवारों को मिले पक्के घर की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि जब सरकारी आवास योजनाओं और सामाजिक संस्थाओं के प्रयास एक साथ जुड़ते हैं, तो समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक भी विकास की रोशनी पहुंच सकती है।
झुग्गी में जिंदगी गुजारने वाले इन परिवारों के लिए पक्के घर की चाबी सिर्फ चार दीवारों की चाबी नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, सम्मान, स्थायित्व और बेहतर भविष्य की उम्मीद का प्रतीक है।
अब निगाहें संस्था के अगले लक्ष्य पर हैं—क्या बैरागी कैंप के बाकी जरूरतमंद परिवारों को भी इसी तरह स्थायी आशियाना मिल पाएगा? यदि संस्था अपने घोषित लक्ष्य को आगे बढ़ाती है, तो आने वाले समय में यह पहल कई और परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।