भाजपा-आरएसएस की विचारधारा के समर्थन के साथ 25 साल पुराने चेहरे को बदलने की उठी आवाज, 2027 चुनाव से पहले शिवम सडाना की राजनीतिक सक्रियता चर्चा में…
“कोई भी नया चेहरा, वही सरकार” अभियान के जरिए स्थानीय मुद्दों और जवाबदेही को लेकर उठाई आवाज….
हरिद्वार, 25 अगस्त 2026।
विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर हरिद्वार विधानसभा क्षेत्र-25 में राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच भारतीय गायक, कलाकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवम सडाना ने हरिद्वार में नए चेहरे और बेहतर जनप्रतिनिधित्व की मांग को लेकर “कोई भी नया चेहरा, वही सरकार” अभियान शुरू कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
सडाना का कहना है कि उनका अभियान सरकार या किसी विचारधारा के विरोध में नहीं है, बल्कि क्षेत्र में बेहतर प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नए नेतृत्व की मांग को लेकर है। उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा के प्रति समर्थन जताते हुए सवाल उठाया कि यदि विचारधारा और सरकार पर जनता का भरोसा कायम है, तो लंबे समय से बने एक ही चेहरे को बदलकर किसी नए, योग्य और जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्ति को अवसर क्यों नहीं दिया जाना चाहिए?
‘सरकार वही रहे, चेहरा नया हो’
शिवम सडाना के अभियान का मूल संदेश ही यही है कि सरकार और विचारधारा में बदलाव जरूरी नहीं, लेकिन जनप्रतिनिधित्व में बदलाव पर विचार होना चाहिए। उनका कहना है कि लोकतंत्र में लंबे समय तक एक ही व्यक्ति को अवसर मिलने के बाद जनता को नए नेतृत्व का विकल्प मिलना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि करीब 25 वर्षों से एक ही राजनीतिक चेहरे के इर्द-गिर्द हरिद्वार विधानसभा की राजनीति घूमती रही है। ऐसे में अब समय आ गया है कि राजनीतिक दल जनता की अपेक्षाओं, क्षेत्र की मौजूदा जरूरतों और नई पीढ़ी की सोच को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों पर भी गंभीरता से विचार करें।
सडाना के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह स्वयं को भी लगातार एक सक्रिय, स्थानीय और संभावित नए चेहरे के रूप में जनता के बीच प्रस्तुत करते नजर आ रहे हैं।
क्या ‘नया चेहरा’ अभियान में खुद भी विकल्प हैं शिवम सडाना?
राजनीतिक चर्चाओं में सबसे बड़ा सवाल यही है कि “कोई भी नया चेहरा, वही सरकार” का नारा केवल जन-जागरूकता अभियान है या इसके पीछे शिवम सदाना की अपनी राजनीतिक भूमिका की भी तैयारी है?
हालांकि सडाना ने अभी किसी राजनीतिक दल से टिकट या चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन जिस तरह वह स्थानीय मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं और 2027 के चुनाव को लेकर नए प्रतिनिधित्व की बात कर रहे हैं, उससे यह चर्चा जरूर तेज हो गई है कि वह खुद को भी हरिद्वार विधानसभा के संभावित नए चेहरे के तौर पर जनता के बीच स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
उनकी रणनीति में सीधे तौर पर सरकार बदलने की बात नहीं, बल्कि “चेहरा बदलो, व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाओ” का संदेश दिखाई देता है।
रानीपुर मोड़ और न्यू हरिद्वार के जलभराव पर सवाल
सडाना ने अपने अभियान को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय हरिद्वार की स्थानीय समस्याओं को भी मुद्दा बनाया है। उन्होंने रानीपुर मोड़ और न्यू हरिद्वार जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में जलभराव और खराब जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
उनका कहना है कि बारिश के दौरान प्रमुख सड़कों और बाजार क्षेत्रों में पानी भरने से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ व्यापारियों और बाहर से आने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि देश-दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी धर्मनगरी है। ऐसे में शहर की सड़कें, जल निकासी, यातायात व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहतर होना बेहद जरूरी है।
‘जनता को सवाल पूछने का अधिकार है’
शिवम सदाना ने कहा कि लोकतंत्र में जनता को अपने प्रतिनिधियों से सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। यदि वर्षों तक किसी क्षेत्र में जलभराव, ड्रेनेज, सड़क और यातायात जैसी समस्याएं बनी रहती हैं, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनके समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय केवल बड़े-बड़े वादे पर्याप्त नहीं हैं। जनता अब काम का हिसाब, विकास की स्थिति और समस्याओं के स्थायी समाधान को भी देखना चाहती है।
सडाना ने कहा कि जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वह कितने लंबे समय से राजनीति में है, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि उसने जनता के लिए कितना काम किया और क्षेत्र की समस्याओं को कितनी गंभीरता से उठाया।
टिकट में प्रदर्शन, क्षमता और जनसेवा बने आधार
सडाना ने राजनीतिक दलों से उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि टिकट केवल राजनीतिक समीकरण, प्रभाव या लंबे राजनीतिक अनुभव के आधार पर नहीं मिलना चाहिए।
उनके मुताबिक उम्मीदवार के चयन में जनसेवा, ईमानदारी, साफ छवि, सामाजिक स्वीकार्यता, नेतृत्व क्षमता, क्षेत्र की समस्याओं की समझ और जनता के बीच सक्रियता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता को ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो चुनाव जीतने के बाद भी लगातार लोगों के बीच रहे और उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाकर समाधान कराने का प्रयास करे।
सनातन मूल्यों और सामाजिक सौहार्द पर भी जोर
शिवम सडाना ने विकास के साथ-साथ सनातन मूल्यों, हिंदू एकता, सामाजिक सौहार्द और भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की पहचान उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है, इसलिए विकास की योजनाओं के साथ धर्मनगरी की गरिमा और पहचान को बनाए रखना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जनता अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझे तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपने प्रतिनिधियों से सवाल करने के लिए जागरूक हो।
‘कोई भी नया चेहरा, वही सरकार’ बना चर्चा का विषय
शिवम सदाना का यह अभियान फिलहाल हरिद्वार विधानसभा की राजनीति में एक नए विमर्श को जन्म देता दिखाई दे रहा है। एक ओर वह भाजपा-आरएसएस की विचारधारा और सरकार के प्रति समर्थन की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर करीब 25 साल पुराने राजनीतिक चेहरे को बदलकर नए नेतृत्व को मौका देने की मांग कर रहे हैं।
यही विरोधाभास उनके अभियान को राजनीतिक रूप से दिलचस्प बना रहा है।
2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन हरिद्वार में “सरकार वही, चेहरा नया” की बहस शुरू हो चुकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा संगठन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण इस नए उभरते विमर्श को किस तरह देखते हैं और क्या आगामी चुनाव में हरिद्वार विधानसभा को वास्तव में कोई नया चेहरा मिलता है।
फिलहाल शिवम सडाना का “कोई भी नया चेहरा, वही सरकार—बेहतर प्रतिनिधित्व, बेहतर हरिद्वार” अभियान 2027 के चुनाव से पहले हरिद्वार की राजनीति में एक नई चर्चा का विषय जरूर बन गया है।