हल्द्वानी, 21 अगस्त। उत्तराखंड में खनन रॉयल्टी की वसूली का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपने और बिना टेंडर प्रक्रिया के कुछ खनन पट्टे आवंटित करने संबंधी नियमावली को उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने सरकार से यह भी बताने को कहा है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के क्रम में अब तक क्या कार्रवाई की गई है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली के अनुसार, हल्द्वानी निवासी संतोष सिंह हर्नवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उत्तराखंड में खनन रॉयल्टी वसूली तथा कुछ खनन पट्टों को बिना टेंडर प्रक्रिया के स्वीकृत करने से संबंधित नियमावली को चुनौती दी है।
याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने खनिज परिवहन नियमों में संशोधन कर रॉयल्टी वसूली का कार्य निजी हाथों में देने का प्रावधान किया है। साथ ही टेंडर प्रक्रिया में सबसे कम बोली लगाने वाली L1 कंपनी को खाली पड़े खनन पट्टों का काम सौंपने का भी प्रावधान किया गया है।याचिकाकर्ता का तर्क है कि खनन रॉयल्टी की वसूली राज्य के राजस्व से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है, जिसे निजी कंपनी को सौंपना राज्य के हितों के विपरीत है। याचिका में नियमावली की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, हाईकोर्ट पूर्व में राज्य सरकार को खनन कार्यों के लिए अलग कॉरपोरेशन गठित करने पर विचार करने के निर्देश दे चुका है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। अब न्यायालय ने सरकार से पूर्व निर्देशों पर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी, जिसमें राज्य सरकार का जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है।