देहरादून, 5 अगस्त।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर मंच से भाषण देने वाले उत्तराखंड पुलिस के निलंबित कॉन्स्टेबल शेर सिंह को विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में उसे उत्तराखंड पुलिस अधिनियम-2007 तथा उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली-2002 के प्रावधानों का उल्लंघन करने का दोषी पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।
पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्काल प्रभाव से शेर सिंह की बर्खास्तगी के आदेश जारी किए। इससे पहले भी शेर सिंह को अनुशासनहीनता और बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप में निलंबित किया जा चुका था।
विभागीय अभिलेखों के अनुसार शेर सिंह 28 जून 2026 से बिना किसी पूर्व अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहा था। उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने का अवसर भी दिया गया, लेकिन उसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद 20 जुलाई 2026 को उसे निलंबित कर दिया गया था और विभागीय जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शेर सिंह ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र आंदोलन में पुलिस की वर्दी पहनकर सार्वजनिक मंच से भाषण दिया। विभाग ने इसे सेवा नियमों, अनुशासन और आचरण संहिता का गंभीर उल्लंघन माना। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर उसे दोषी ठहराते हुए सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया।
उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शेर सिंह अब विभाग का कर्मचारी नहीं है। विभाग ने कहा कि भविष्य में उसकी किसी भी व्यक्तिगत गतिविधि या बयान के लिए उत्तराखंड पुलिस किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं होगी।
पुलिस विभाग ने यह भी बताया कि शेर सिंह का नाम पहले से दर्ज एक आपराधिक मामले में भी सामने आ चुका है। एसटीएफ की जांच में वह कथित भूमि कब्जा और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से जुड़े मामले में आरोपी रहा है। इस मामले में वर्ष 2025 में उसकी गिरफ्तारी हुई थी और वह जेल भी जा चुका है।
उत्तराखंड पुलिस ने अपने बयान में कहा कि विभाग में अनुशासन, सत्यनिष्ठा और सेवा आचरण सर्वोपरि हैं। किसी भी कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग ने दोहराया कि भविष्य में भी सेवा नियमों के विरुद्ध कार्य करने वाले कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।