हरिद्वार, 5 जुलाई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के निर्माण की घोषणा के बाद हरिद्वार स्थित ऋषिकुल विद्यापीठ ब्रह्मचर्य आश्रम परिसर में पिछले लगभग 100 वर्षों से रह रहे करीब 250 परिवारों और 200 व्यापारियों में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है। सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों से मिली जानकारी के बाद स्थानीय लोगों को आशंका है कि शोध संस्थान के निर्माण के लिए उनके घरों और दुकानों को हटाया जा सकता है।

इसी चिंता को लेकर क्षेत्रवासियों ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों के साथ महिला निवासियों ने भी भाग लिया। बैठक में वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोम त्यागी और मनोज सैनी भी पहुंचे और उन्होंने क्षेत्रवासियों की मांगों का समर्थन किया।

बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उन्हें मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के निर्माण से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वर्षों से यहां रह रहे परिवारों को किसी भी कीमत पर विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों में यह भ्रम और डर व्याप्त है कि उनके घरों और दुकानों को हटाकर संस्थान बनाया जाएगा। सरकार को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए जिससे स्थानीय लोगों को नुकसान पहुंचे।

सोम त्यागी और मनोज सैनी ने सरकार से मांग की कि यदि शोध संस्थान का निर्माण किया जाना है तो इसके लिए ऋषिकुल मैदान या अन्य उपलब्ध खाली सरकारी भूमि का चयन किया जाए, ताकि दशकों से रह रहे परिवारों का आशियाना सुरक्षित रह सके।

बैठक में मौजूद क्षेत्रवासी जवाहर चावला और योगेश श्याम सिंह ने कहा कि उनके परिवार कई पीढ़ियों से ऋषिकुल विद्यापीठ परिसर में निवास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे शोध संस्थान के निर्माण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें उजाड़ना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। उनका कहना था कि सरकार के पास पर्याप्त खाली भूमि उपलब्ध है और संस्थान का निर्माण वहां किया जाना चाहिए।

बैठक के दौरान कमलापति, अभय शर्मा, गगन देशवाल, पूरन सिंह, विभाग त्यागी, मनोज ठाकुर, अमित, टेक बहादुर, कमल सेन, पूसा कोमल, निर्मल देवी, गिरी लक्ष्मी, दीपक कुमार, देवी दत्त कांडपाल, श्रुति समर्थ अग्रवाल सहित अन्य लोगों ने निर्णय लिया कि सोमवार को एक प्रतिनिधिमंडल सिटी मजिस्ट्रेट से मुलाकात करेगा। इस दौरान शोध संस्थान की प्रस्तावित योजना और संभावित विस्थापन को लेकर प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जाएगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत पर वर्षों से बसे परिवारों को बेघर करना उचित नहीं होगा। अब सभी की नजर सोमवार को होने वाली प्रशासन के साथ बैठक पर टिकी है, जिससे इस पूरे मामले में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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