प्रेमाभक्ति, सेवा, सुमिरन और सत्संग से जीवन में आते हैं दया, करुणा और भाईचारे के दिव्य गुण…
हरिद्वार, 04 सितंबर 2026।
बीएचईएल सेक्टर-1 स्थित सामुदायिक केंद्र में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के पावन आशीर्वाद से जोन स्तरीय निरंकारी महिला संत समागम का भव्य आयोजन किया गया। समागम में जोन की विभिन्न शाखाओं से बड़ी संख्या में बहनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीतों, कविताओं, नाटकों और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मानवता, प्रेम, करुणा, नम्रता और सद्भाव का संदेश प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
समागम का वातावरण आध्यात्मिकता और भक्ति से सराबोर रहा। विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से बहनों ने यह संदेश दिया कि आध्यात्मिक जीवन केवल विचारों तक सीमित न रहकर हमारे व्यवहार और आचरण में भी दिखाई देना चाहिए। कार्यक्रम में महिला शक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए परिवार और समाज में प्रेम, संस्कार तथा सकारात्मक मूल्यों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
प्रेमाभक्ति को बताया जीवन का आधार
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का पावन संदेश साध संगत तक पहुंचाते हुए बहन रश्मि राघव ने अपने विचारों में कहा कि जीवन में प्रेमाभक्ति का विशेष महत्व है। प्रेमाभक्ति के माध्यम से दया, करुणा, प्रेम, नम्रता, मिलवर्तन और भाईचारे जैसे दिव्य गुण मनुष्य के आचरण में सहज रूप से प्रकट होने लगते हैं।
उन्होंने भक्ति के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भक्ति परमात्मा को पाने का नाम है। जब मनुष्य की आत्मा को परमात्मा के स्वरूप का एहसास होता है, तभी उसके जीवन में दया और करुणा के भाव उत्पन्न होते हैं। ऐसे भाव व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ उसके परिवार और समाज को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
शबरी जी के उदाहरण से समझाया नवधा भक्ति का महत्व
उन्होंने शबरी जी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए नवधा भक्ति के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि भक्ति के ये स्वरूप जीवन के प्रत्येक क्षण में सहजता और आध्यात्मिक स्थिरता प्रदान करते हैं। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज भी अपने संदेशों के माध्यम से भक्तों को भक्ति के इन्हीं दिव्य गुणों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा प्रदान कर रही हैं।


उन्होंने कहा कि सेवा, सुमिरन और सत्संग के माध्यम से मनुष्य के जीवन में भक्ति के दिव्य गुण विकसित होने लगते हैं। इससे परमात्मा के प्रति विश्वास और समर्पण मजबूत होता है तथा व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है।
ब्रह्मज्ञान से निराकार परमात्मा के एहसास पर जोर
भक्ति के विषय को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि साकार की भक्ति के माध्यम से ही निराकार परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त होता है। निरंकारी मिशन में ब्रह्मज्ञान के माध्यम से भक्तों को कण-कण में व्याप्त परमात्मा का एहसास कराया जाता है। यह ज्ञान जीवन में दृढ़ता और विश्वास उत्पन्न करता है तथा हर परिस्थिति में आनंद की अवस्था बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि सतगुरु के ज्ञान और प्रवचनों से जीवन को सही दिशा मिलती है। जब आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाया जाता है तो परिवार में भी प्रेम, सौहार्द और आपसी सम्मान का वातावरण बनता है। यही संस्कार आगे चलकर समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
महिला संत समागम के दौरान विभिन्न शाखाओं से आई बहनों ने भक्ति गीत, कविताएं, नाटक और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों में निरंकारी मिशन के आध्यात्मिक एवं मानवीय संदेश को रचनात्मक ढंग से सामने रखा गया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रस्तुतियों की सराहना की और भक्ति एवं सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
समागम के समापन अवसर पर मंसूरी जोन के जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह ने कार्यक्रम में सम्मिलित सभी श्रद्धालु भक्तों, बहनों एवं सेवादारों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने समागम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सेवादारों की सेवा भावना की सराहना करते हुए धन्यवाद दिया।
समागम ने यह संदेश दिया कि आध्यात्मिकता तभी सार्थक है, जब वह मानव जीवन में प्रेम, दया, करुणा, नम्रता और भाईचारे के रूप में दिखाई दे। महिला संत समागम के माध्यम से इन मूल्यों को परिवार और समाज तक पहुंचाने का प्रेरणादायी प्रयास किया गया।