हरिद्वार, 17 सितम्बर ।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ के अंतर्गत ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक ऋचाओं के पावन उद्घोष और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विश्वविद्यालय परिसर स्थित शिव मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में सेवा, संस्कार और संस्कृति के मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सेवा भारतीय संस्कृति और संस्कारों का मूल आधार है। सेवा केवल किसी व्यक्ति की सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन भी सेवा का ही स्वरूप है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर सेवा, संवेदना, सहयोग, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ विद्यार्थियों को ‘मैं’ की सीमित सोच से निकालकर ‘हम’ की व्यापक चेतना से जोड़ने का प्रयास है। छोटे-छोटे सेवा कार्य ही भविष्य में बड़े सामाजिक बदलाव की नींव बन सकते हैं।

अभियान की नोडल अधिकारी प्रो. बिंदुमति द्विवेदी ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के तहत विभिन्न रचनात्मक और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। ‘मेरा सपनों का भारत’ के अंतर्गत चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता, ‘सेवा कार्य’ के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक एवं निबंध प्रतियोगिता तथा ‘सेवा-मेरा योगदान’ के तहत वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और ‘लोकल फॉर लोकल’ जागरूकता रैली आयोजित की जाएगी।
इसके अलावा ‘सेवा-मेरा संकल्प’, ‘सेवा के रंग’, ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ और ‘विकसित भारत @2047’ जैसे विषयों के माध्यम से शिक्षण-जागरूकता, रंगोली, खेलकूद, योग-प्राणायाम और डिजिटल इंडिया सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
सह-नोडल अधिकारी श्रीमती मीनाक्षी सिंह रावत ने कहा कि यह अभियान विद्यार्थियों में सेवा-भावना के साथ-साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र-निर्माण के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर अभियान को सफल बनाने के लिए विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्यों, सह-आचार्यों एवं सहायक आचार्यों के दायित्व निर्धारित किए गए। इस दौरान अभियान की आगामी गतिविधियों और उनके प्रभावी संचालन को लेकर सार्थक विमर्श भी हुआ।
इस अवसर पर निजी सचिव श्री मनोज गहतोड़ी सहित विश्वविद्यालय के छात्र-अध्यापक, छात्र-अध्यापिकाएं, विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।