हरिद्वार, 24 अगस्त 2026।
सोमवार को प्रेस क्लब सभागार में कांग्रेस की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने “वन नेशन, वन इलेक्शन” के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्री बालेश्वर सिंह सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

आलोक शर्मा ने कहा कि भाजपा द्वारा धार्मिक मंचों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस साधु-संतों और धर्माचार्यों का सदैव सम्मान करती है, लेकिन जब धार्मिक आयोजनों में राजनीतिक बयानबाजी के माध्यम से देश के मूल मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास किया जाएगा तो कांग्रेस उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी।

उन्होंने कहा कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” केवल चुनावी खर्च का विषय नहीं है, बल्कि यह देश के संघीय ढांचे, क्षेत्रीय मुद्दों, छोटे राजनीतिक दलों और सरकारों की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर संवैधानिक विषय है। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि किसी भी व्यवस्था में जनादेश का सम्मान होने के साथ सरकारों की जवाबदेही भी बनी रहनी चाहिए।

राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि यदि किसी राज्य में चुनाव के बाद बीच कार्यकाल में सरकार गिर जाती है तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन की संभावना बढ़ेगी, जिससे केंद्र की शक्ति राज्यों की तुलना में अधिक मजबूत हो सकती है। उन्होंने इसे भारतीय संघीय व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में हर राज्य और क्षेत्र के अपने अलग-अलग मुद्दे हैं। नगर निगम, नगर पालिका, विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अलग-अलग सवाल जनता के सामने होते हैं। यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएंगे तो राष्ट्रीय मुद्दों का प्रभाव स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर हावी हो सकता है तथा छोटे एवं क्षेत्रीय दलों के सामने संसाधनों की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

“एक साथ चुनाव से सबसे बड़ा नुकसान जवाबदेही की व्यवस्था को हो सकता है”—यह कहते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि आज जनता विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अलग-अलग सरकारों के कामकाज का मूल्यांकन कर सकती है। स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी पार्षदों और नगर निकायों की होती है, वहीं विधायक और सांसद भी अपने-अपने स्तर पर जनता के प्रति जवाबदेह रहते हैं। यदि सभी चुनाव एक साथ होंगे तो यह जवाबदेही कमजोर पड़ सकती है।

आलोक शर्मा ने रामनाथ कोविंद समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर अभी संसदीय प्रक्रिया जारी है और संयुक्त संसदीय समिति में भी चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सवाल यह है कि इतनी महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था पर देश में व्यापक बहस होनी चाहिए और जनता व साधु सन्यासियों को पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।

उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पेपर लीक, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, कानून-व्यवस्था और अन्य गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए बार-बार नए राजनीतिक विषय सामने लाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चुनावी नारों के बजाय जनता की रोजमर्रा की समस्याओं पर जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने महंगाई और रोजगार के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने पेट्रोल, गैस सिलेंडर और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि जनता को यह बताया जाना चाहिए कि महंगाई कम करने और रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार ने वास्तव में क्या किया।

इलेक्टोरल बॉन्ड और चुनाव सुधारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है। उनका आरोप था कि भाजपा सरकार चुनाव सुधारों की बात तो करती है, लेकिन राजनीतिक चंदे और चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल आज भी मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता और संघीय व्यवस्था है। भाषा, संस्कृति, क्षेत्र और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग राज्यों के मुद्दे अलग हैं। ऐसे में केवल राष्ट्रीय मुद्दों के आधार पर चुनाव होने से क्षेत्रीय समस्याएं पीछे छूट सकती हैं।

प्रेस वार्ता में केंद्र और राज्य सरकार की जवाबदेही, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, चुनावी फंडिंग, संघीय ढांचा और उत्तराखंड के स्थानीय मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए।

आलोक शर्मा ने उत्तराखंड के संदर्भ में अंकिता भंडारी प्रकरण का मुद्दा भी उठाया और कहा कि प्रदेश की बेटी को न्याय दिलाने के सवाल पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने संत समाज से भी अपील की कि वे राजनीतिक दलों के मंच का हिस्सा बनने से पहले संबंधित मुद्दों की पूरी सच्चाई और दस्तावेजों को समझें।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस साधु-संतों का सम्मान करती है और उनके धार्मिक एवं सामाजिक योगदान को स्वीकार करती है, लेकिन धर्म के मंच को किसी राजनीतिक दल के प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

अलोक शर्मा ने कहा, “भाजपा भारत नहीं है, भाजपा हिंदुत्व नहीं है, सरकार भारत नहीं है और कोई एक व्यक्ति भारत नहीं है। भारत करोड़ों देशवासियों से मिलकर बना है।” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी दल या व्यक्ति का वर्चस्व संविधान और संस्थाओं से ऊपर नहीं हो सकता।

उन्होंने संत समाज से अपील करते हुए कहा कि जब भी “वन नेशन, वन इलेक्शन” को लेकर उनके सामने तर्क रखे जाएं तो वे संबंधित रिपोर्ट और दस्तावेजों को स्वयं पढ़ें तथा देशहित, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक जवाबदेही के दृष्टिकोण से अपना मत बनाएं।

प्रेस वार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” पर अंतिम निर्णय जल्दबाजी में नहीं बल्कि व्यापक संवैधानिक, राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के बाद होना चाहिए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह लोकतंत्र, संघीय ढांचे और जनता की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर अपना संघर्ष जारी रखेगी। कांग्रेस जनहित से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और प्रदेश की जनता की आवाज को मजबूती से सामने रखेगी।

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