हरिद्वार, 27 अगस्त 2026।
गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार की ऐतिहासिक यज्ञशाला में नवप्रविष्ट ब्रह्मचारियों के उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार समारोह का आयोजन वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ श्रद्धा एवं गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नवप्रविष्ट विद्यार्थियों को वैदिक शिक्षा, अनुशासन, सदाचार और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प दिलाया गया।

समारोह के दौरान यज्ञीय परंपरा के अनुरूप ब्रह्मचारियों का उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार सम्पन्न कराया गया। कार्यक्रम के यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य डॉ. योगेश शास्त्री ने विधि-विधानपूर्वक संस्कार संपन्न कराते हुए विद्यार्थियों को वेदों के महत्व तथा भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल जीवन केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण, अनुशासन, सदाचार और आत्मसंयम की तपोभूमि है। उपनयन संस्कार को जीवन के महत्वपूर्ण संस्कारों में बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से ब्रह्मचारी के वैदिक एवं आध्यात्मिक अध्ययन का विधिवत आरंभ होता है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए गुरुकुल के मुख्याधिष्ठाता डॉ. दीनानाथ शर्मा ने नवप्रविष्ट विद्यार्थियों को ब्रह्मचर्य, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ अध्ययन करने का आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल की शिक्षा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को संस्कारित करने के साथ-साथ उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के लिए तैयार करती है।

कार्यक्रम के संयोजक एवं प्रधानाचार्य डॉ. विजेन्द्र शास्त्री ने नवप्रविष्ट ब्रह्मचारियों को संस्कारयुक्त जीवनशैली अपनाने और निरंतर स्वाध्याय के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से देश एवं समाज सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाने का आह्वान किया। उन्होंने अथर्ववेद के ब्रह्मचर्य सूक्त के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार की उपयोगिता और इसकी वैदिक परंपरा को विस्तार से समझाया। साथ ही उन्होंने समारोह में पहुंचे सभी अभिभावकों एवं अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

समारोह में ब्रह्मचारियों द्वारा वेदपाठ की प्रस्तुति दी गई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक एवं वैदिक भाव से भर दिया। संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन धर्मेन्द्र आर्य द्वारा किया गया। इस दौरान तरुण, वंश, कार्तिक, युवराज, रोहित, हर्षवर्धन, आयुष, जितिन, समर्थ, भानु, ईशान, रुद्र, अर्णव, दक्ष, रचित, अविरल, मानस, लक्ष्य, हृदांश एवं सत्यजीत ने संस्कृत गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। वहीं छोटे बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने भी कार्यक्रम में आकर्षण बढ़ाया और दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।

समारोह में बड़ी संख्या में अभिभावक, अतिथि, गुरुकुल के अधिष्ठाता एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर जितेन्द्र कुमार वर्मा, अशोक कुमार आर्य, हुकमचन्द, अश्विनी कुमार, अमर सिंह, ब्रजेश सिंह, वेदपाल सिंह, लोकेश सिंह, अमित कुमार, राज कमल, अशोक कुमार, विजय कुमार, धर्म सिंह, गौरव शर्मा, मामराज सिंह, सत्यवीर सिंह, फकीरचन्द, रोहित बालियान, दिनेश कुमार, सज्जन सिंह, धीरज दत्त कौशिक, तुषार सिंह, मुकेश, अनुज, भास्कर पाण्डे, सुभांशु, उदयराज, प्रभात मलिक, योगेश शर्मा, धर्मेन्द्र सिंह, गौरव मलिक, मोहित, अनिल, राहुल, विकास एवं आदर्श भारद्वाज सहित समस्त अधिष्ठातागण एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

समारोह का समापन नवप्रविष्ट ब्रह्मचारियों के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम चरित्र एवं राष्ट्रहित में समर्पित जीवन की मंगलकामना के साथ हुआ। गुरुकुल कांगड़ी की इस वैदिक परंपरा ने एक बार फिर भारतीय संस्कृति, संस्कार और गुरुकुलीय शिक्षा की जीवंत विरासत को सामने रखा।

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