
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कानून व्यवस्था अक्सर सवालों के घेरे में रहती है , क्योंकि यहां अक्सर मारपीट और किसी की भी दुकान में तोड़फोड़ कर देना एक आम बात माना जाता है । वहीं होली से ठीक पहले देहरादून के व्यस्त घंटाघर क्षेत्र में हुई हिंसक घटना ने शहर की कानून-व्यवस्था और त्योहारों के दौरान सुरक्षा इंतज़ामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चकराता रोड स्थित एक मोबाइल मार्ट में कुछ युवकों द्वारा कथित रूप से की गई मारपीट और तोड़फोड़ से व्यापारी वर्ग में भय और आक्रोश का माहौल है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सोमवार शाम करीब पांच बजे कुछ युवक राहगीरों,,विशेषकर लड़कियों,,पर पानी से भरे गुब्बारे फेंक रहे थे। आसपास के दुकानदारों ने इसका विरोध किया तो कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। स्थानीय व्यापारियों ने किसी तरह युवकों को वहां से हटाकर स्थिति शांत कराई, लेकिन तनाव बना रहा।
आरोप है कि कुछ देर बाद वही युवक बड़ी संख्या में वापस लौटे। उन्होंने गाली-गलौज करते हुए मोबाइल शॉप में घुसकर स्टाफ को बाहर घसीटा और ईंट-डंडों से जमकर मारपीट की। दुकान में तोड़फोड़ भी की गई। हमले में अक्षय नामक कर्मचारी के सिर में गंभीर चोट आई, जिसके चलते उसे टांके लगाने पड़े। दुकान मालिक दीपक का कहना है कि हमलावरों ने महिला स्टाफ से भी अभद्रता की और जाते समय धमकी देकर गए, जिससे वे दहशत में हैं।
घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें भीड़ के बीच मौजूद पुलिसकर्मी हालात संभालने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। दोनों पक्षों की तहरीर पर थाना नगर कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 115(2), 324(2), 333 और 351(3) के तहत तीन युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सीओ सिटी स्वप्निल मुयाल ने पुष्टि की कि राहगीरों पर गुब्बारे फेंकने के विरोध से विवाद शुरू हुआ था और मारपीट की घटना सामने आई है। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
त्योहार आपसी भाईचारे और उल्लास का प्रतीक होते हैं, लेकिन ऐसे घटनाक्रम सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचाते हैं। व्यापारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि दोषियों पर त्वरित कार्रवाई कर विश्वास बहाल किया जाएगा, ताकि त्योहार शांति और गरिमा के साथ मनाया जा सके।