राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को हिंदू संगठन का कार्य करते हुए सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शताब्दी वर्ष के अंतर्गत समाज जीवन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मातृशक्ति संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें समाज में महिलाओं की भूमिका और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
हरिद्वार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा होटल पार्क ग्रैंड में मातृशक्ति संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में महिला वक्ताओं ने मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका और समाज में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गायत्री परिवार की श्रीमती शैफाली पांडेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति की आधारशिला नारी है। भारत में नारी को देवी स्वरूपा माना गया है और वह परिवार एवं समाज को संस्कारवान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मुख्य वक्ता प्रखर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने संघ के शताब्दी वर्ष में लिए गए पंच परिवर्तन संकल्प को दोहराते हुए कहा कि भारतीय नारियों को इन संकल्पों को अपने जीवन में अपनाकर कुटुंब प्रबंधन के माध्यम से परिवार के मूल्य और संस्कारों का संरक्षण करना चाहिए।
समाजसेवी अर्चना जैन ने मातृशक्ति के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ही समाज सशक्त और संगठित बन सकता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कल्पना चौधरी ने किया।
गोष्ठी के आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संपर्क प्रमुख सीए अनिल वर्मा ने संघ के सौ वर्षों की संघर्षमयी यात्रा और समाज निर्माण में उसकी भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति से वंदना जी , ममता जी, अंजली माहेश्वरी, डॉ. अश्विनी चौहान, डॉ. प्रीत शिखा शर्मा, विजय लक्ष्मी, नीलिमा, पद्मिनी, डॉ. करुणा, डॉ. आसीना, सरला कुमारी, डॉ. मधु, श्वेता सहित विशेष श्रेणी संपर्क प्रमुख संजय पवार, जिला संपर्क प्रमुख अमित चौहान एवं नगर संपर्क प्रमुख सुशील सैनी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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