
उत्तराखंड राजधानी देहरादून में 13 फरवरी की सुबह हुए सनसनीखेज विक्रम शर्मा हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। सिल्वर सिटी मॉल स्थित जिम के बाहर सुबहे 7.65 बोर की विदेशी पिस्टल से तीन गोलियां दागकर हत्या की गई थीपहली गोली सिर से सटाकर मारी गई। यह वारदात किसी तात्कालिक झगड़े का नतीजा नहीं, बल्कि महीनों से रची जा रही साजिश का अंजाम थी। उत्तराखंड एसटीएफ और दून पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में साजिश की परतें खुलीं। एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के मुताबिक, हत्या की स्क्रिप्ट करीब 180 दिन पहले लिखी गई। आरोपियों ने पहले जमशेदपुर और फिर नोएडा में मौका तलाशा, लेकिन असफल रहने पर देहरादून को टारगेट बनाया। घटना से लगभग तीन महीने पहले साजिश में शामिल अंकित वर्मा ने वही जिम ज्वाइन किया, जहां विक्रम नियमित जाते थे। घटना वाले दिन जिम से ही शूटरों को कॉल कर लोकेशन दी गई “तैयार रहो।” साजिशकर्ताओं ने नोएडा के सेक्टर 78-79 में फ्लैट लेकर ‘वार रूम’ बनाया। गिरफ्तार मोहित उर्फ अक्षत ठाकुर—जो Galgotias University में BBA का छात्र है,, ने शूटरों को अपने फ्लैट में पनाह दी और रसद की व्यवस्था की। हत्या के पीछे तीन बड़े पॉइंट मछली सप्लाई व रंगदारी का विवाद फरार आरोपी यशराज की कंपनी ‘सारिका इंटरप्राइजेज’ के ठेके में दखल और कथित रंगदारी की मांग।
वर्चस्व की जंग – मुख्य शूटर आयुषतोष सिंह कथित तौर पर अपराध जगत में दबदबा बनाना चाहता था।
जेल का बदला – विशाल सिंह का पुराना विवाद, जिसमें जेल के भीतर प्रताड़ना का आरोप।
हत्या के बाद फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ। सहस्रधारा रोड पर बाइक छोड़ी गई, फिर हरिद्वार से किराए के दोपहिया लिए गए। अंत में यशराज की स्कॉर्पियो (JH-05-AJ-5517) से नोएडा की ओर फरार हुए।
पुलिस ने राजकुमार (यशराज का पिता) और मोहित उर्फ अक्षत ठाकुर को गिरफ्तार किया है। छह फरार आरोपियों.. अंकित वर्मा, आयुषतोष सिंह, विशाल सिंह, आकाश कुमार, यशराज और जितेंद्र कुमार साह पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
खुलासे में सामने आया कि सुनियोजित अपराध किस तरह ‘इनसाइडर’ इनपुट, लंबी रेकी और मल्टी-स्टेट मूवमेंट के सहारे अंजाम दिए जाते हैं। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और कानून के शिकंजे से कोई नहीं बचेगा।