कल 23 मार्च सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने चार लोगों—नरेश, कमलेश, नरेंद्र और उज्जवल—के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। आरोप है कि इन लोगों ने एक ही संपत्ति के कागजात लगाकर अलग-अलग न्यायालयों में अलग-अलग समय पर जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए और जमानती बने। पुलिस के अनुसार, झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर जमानत लेने के मामले में कार्रवाई करते हुए सिडकुल थाने में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
आज सुबह 24 मार्च मंगलवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश करने से पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उष्णावन में उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इस दौरान आरोपी नरेश ने ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को पहले पेट में दर्द और बाद में सीने में दर्द की शिकायत बताई।
डॉक्टर द्वारा प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। चूंकि घटना पुलिस अभिरक्षा में हुई है, इसलिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की गाइडलाइंस के तहत माननीय जिला जज को सूचित किया गया है। उनके निर्देश पर न्यायिक मजिस्ट्रेट को जांच के लिए नियुक्त किया गया है, जो इनक्वेस्ट रिपोर्ट और अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एनएचआरसी की सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का पालन करते हुए मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।