हरिद्वार, 31 अक्टूबर।
धर्मनगरी हरिद्वार स्थित प्रतिष्ठित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में कुलसचिव के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद शिक्षा जगत में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुलसचिव के साथ मारपीट होती दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद हरिद्वार पुलिस ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में कुछ लोग पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। इसी दौरान बुजुर्ग कुलसचिव यानी वाइस चांसलर द्वारा सुझाव दिए जाने के बाद विवाद बढ़ने की बात सामने आई है। आरोप है कि विवाद ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया और कुलसचिव के साथ मारपीट की गई।

वायरल वीडियो में कुलसचिव को जमीन पर गिराकर उनके साथ मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन, सुरक्षा और आपसी संवाद की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर कोतवाली कनखल पुलिस ने वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में रजनीश भारद्वाज, नरेंद्र मलिक, ओमबीर सिंह और उमाशंकर शामिल हैं।

पुलिस की यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय द्वारा संचालित ऑपरेशन प्रहार के तहत की गई है। कार्रवाई में कोतवाली प्रभारी देवेंद्र सिंह रावत सहित पुलिस टीम शामिल रही।

लेकिन इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल चार आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं है।

सवाल यह है कि आखिर एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में विवाद को बातचीत और संवैधानिक तरीके से सुलझाने के बजाय हिंसा का रास्ता क्यों अपनाया गया? क्या विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित है? भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी?

शिक्षण संस्थान केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे संस्कार, अनुशासन, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव भी रखते हैं। ऐसे परिसर में हिंसा की घटनाएं पूरे शिक्षा जगत के लिए चिंता का विषय हैं।

अब जरूरत है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो और विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे, जिससे भविष्य में किसी भी शिक्षक, अधिकारी या विद्यार्थी की गरिमा और सुरक्षा से समझौता न हो।

क्योंकि शिक्षा के मंदिर में असहमति की जगह हो सकती है, लेकिन हिंसा की नहीं।
“विरोध और मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके मौजूद हैं, लेकिन किसी भी विवाद का जवाब हिंसा नहीं हो सकता। गुरुकुल कांगड़ी में हुई इस घटना ने एक बार फिर शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा और अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।”

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