देहरादून,21 अक्टूबर 2026।
उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार अब मदरसों को शिक्षा विभाग के निर्धारित नियमों के दायरे में ला रही है। नई व्यवस्था के तहत स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों में शुक्रवार के स्थान पर रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि स्कूल के रूप में मान्यता लेने वाले संस्थानों को अन्य विद्यालयों की तरह निर्धारित शैक्षणिक नियमों का पालन करना होगा।

452 मदरसों में से 76 को मिली स्कूल की मान्यता
प्रदेश में पहले मदरसा बोर्ड के तहत 452 मदरसे मान्यता प्राप्त थे। नई व्यवस्था के तहत इन संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता मिल चुकी है, जबकि 114 आवेदन शिक्षा विभाग में लंबित हैं। शेष संस्थानों की स्थिति उनकी पात्रता और निर्धारित मानकों को पूरा करने पर निर्भर करेगी।

शुक्रवार की जगह रविवार को साप्ताहिक अवकाश
नई व्यवस्था के प्रमुख बदलावों में मदरसों में शुक्रवार के बजाय रविवार को साप्ताहिक अवकाश शामिल है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, पंजीकृत मदरसे अब स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें शिक्षा विभाग और प्राधिकरण के निर्धारित नियमों के अनुसार ही संचालन करना होगा।

सरकार का तर्क है कि शैक्षणिक व्यवस्था में एकरूपता लाने के लिए सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों को निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर और विभागीय निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड
राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड की नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत मुस्लिम समुदाय के साथ सिख, जैन, बौद्ध और पारसी सहित अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों को भी नियामकीय व्यवस्था के दायरे में लाने की प्रक्रिया चल रही है।

नई व्यवस्था में धार्मिक शिक्षा के साथ निर्धारित शैक्षणिक पाठ्यक्रम पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। संस्थानों को इसके लिए जरूरी पंजीकरण, मान्यता और अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

नियमों का पालन नहीं करने पर हो सकती है कार्रवाई
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, शिक्षा विभाग और प्राधिकरण की अनुमति के बिना मदरसों का संचालन नहीं किया जा सकता। निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

करीब 30 हजार बच्चों की शिक्षा से जुड़ा मामला
प्रदेश में पहले मदरसों में करीब 30 हजार बच्चे इस्लामिक शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। ऐसे में नई व्यवस्था का असर हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने संस्थान निर्धारित शर्तों को पूरा कर स्कूल की मान्यता प्राप्त करते हैं और शिक्षा विभाग में लंबित आवेदनों पर क्या निर्णय लिया जाता है।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलाव का मुख्य उद्देश्य संस्थानों को निर्धारित शैक्षणिक नियमों के अनुरूप संचालित करना बताया जा रहा है। हालांकि, नई व्यवस्था का वास्तविक असर मान्यता प्रक्रिया, पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ने वाले प्रभाव से स्पष्ट होगा।

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