हरिद्वार के आर्यनगर स्थित आश्रम में 12 से 18 अक्टूबर तक हो रहा सात दिवसीय ध्यान योग शिविर, देश के विभिन्न राज्यों से साधक ले रहे भाग; आवास और भोजन की भी व्यवस्था…

हरिद्वार, 15 अक्टूबर 2026।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आत्मिक संतुलन की आवश्यकता को देखते हुए हरिद्वार के आर्यनगर स्थित पातंजल योगधाम आश्रम में सात दिवसीय ध्यान योग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। 12 से 18 अक्टूबर तक आयोजित इस शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से साधक पहुँच रहे हैं। शिविर के तीसरे दिन तक लगभग 200 शिविरार्थियों के पहुँचने से आश्रम में ध्यान, योग और आध्यात्मिक साधना का माहौल बना हुआ है।

आश्रम के अध्यक्ष स्वामी मेघानंद सरस्वती जी ने बताया कि यह ध्यान योग शिविर स्वामी योगानंद सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में आयोजित किया जा रहा है। शिविर में साधकों को ध्यान-साधना, योगाभ्यास और वैदिक जीवन-पद्धति के माध्यम से स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ध्यान पूजा की श्रेष्ठ पद्धतियों में से एक है। वर्तमान समय की आपाधापी और तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग मनुष्य को मानसिक शांति, आत्मानुशासन और जीवन में संतुलन की दिशा दिखा सकता है।

1972 में हुई थी आश्रम की स्थापना
स्वामी मेघानंद सरस्वती जी ने बताया कि पातंजल योगधाम आश्रम की स्थापना वर्ष 1972 में स्वामी सच्चिदानंद योगी एवं स्वामी दिव्यानंद योगी द्वारा की गई थी। स्थापना के उद्देश्यों के अनुरूप आश्रम में योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधना के प्रति लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जाते रहे हैं। वर्तमान शिविर भी इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण पहल है।

ध्यान, मौन, योगाभ्यास और वैदिक विषयों पर हो रहा मंथन
आश्रम के जनसंपर्क अधिकारी त्रिलोक वत्स ने बताया कि इस शिविर में राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित देश के अनेक स्थानों से लोग भाग ले रहे हैं। शिविर की विशेषता यह है कि इसमें केवल योगाभ्यास ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने वाली विभिन्न गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।

शिविर के दौरान ध्यान-साधना, अधिकांश समय मौन रहना, योगिक व्यायाम, तनाव से मुक्ति के उपाय, औषधियों के माध्यम से उपचार संबंधी गतिविधियाँ तथा वैदिक विषयों पर चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही वैदिक संध्या-उपासना, दैनिक हवन और वैदिक प्रवचनों के माध्यम से साधकों को आध्यात्मिक जीवन-पद्धति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कम शुल्क में आवास और भोजन की सुविधा
शिविर में शामिल होने वाले साधकों के लिए बहुत कम शुल्क पर भागीदारी की व्यवस्था की गई है। साथ ही आश्रम की ओर से शिविरार्थियों के रहने और भोजन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोग सुविधापूर्वक शिविर में शामिल होकर साधना कर सकें।

योग और ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील
त्रिलोक वत्स ने कहा कि शिविर का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को ध्यान और योग के महत्व से परिचित कराना है, ताकि वे इससे प्रेरणा लेकर अपने दैनिक जीवन में योग एवं ध्यान को स्थान दें। उन्होंने शिविरार्थियों से अपने अनुभव परिवारजनों, मित्रों और परिचितों के साथ साझा करने की अपील भी की, जिससे अधिक से अधिक लोग योग की उपयोगिता को समझ सकें।

उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ समय स्वयं के लिए निकालना, मन को शांत रखना और शरीर को सक्रिय बनाए रखना बेहद आवश्यक है। ऐसे में ध्यान योग शिविर लोगों को अपनी जीवनशैली पर विचार करने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर प्रदान कर रहा है।

आश्रम में उमड़ रही साधकों की सहभागिता इस बात का संकेत है कि आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच लोग मानसिक शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक संतुलन के लिए योग एवं ध्यान की ओर रुख कर रहे हैं।

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