नई कमेटी के गठन पर सवाल, राम विशाल दास महाराज ने भी जताई चिंता; निष्पक्ष जांच कराकर आश्रम की संपत्ति सुरक्षित करने की उठी मांग

हरिद्वार, 14 अक्टूबर 2026।
अमेरिकन आश्रम की संपत्ति, प्रबंधन और नई कमेटी के गठन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। आश्रम प्रबंधक की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए बाबा हठयोगी ने आश्रम की संपत्ति की सुरक्षा, प्रबंधन व्यवस्था की जांच और कथित व्यवसायीकरण पर रोक लगाने की मांग उठाई है। प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि आश्रम की संपत्ति किसी की निजी महत्वाकांक्षा या स्वार्थ का माध्यम नहीं बननी चाहिए। उन्होंने शासन-प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आश्रम की संपत्ति और उसके मूल उद्देश्य को सुरक्षित रखने की अपील की।

आश्रम की संपत्ति को लेकर आमने-सामने आए पक्ष
बाबा हठयोगी ने कहा कि अमेरिकन आश्रम की संपत्ति से उनका कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं जुड़ा है, लेकिन वह आश्रम की जमीन और अन्य संपत्तियों को कथित तौर पर खुर्द-बुर्द किए जाने की आशंका को लेकर चिंतित हैं। उनके अनुसार, पूर्व में गठित कमेटी में वह अध्यक्ष हैं और आश्रम से जुड़े कई निर्णय संबंधित महिला की सहमति से लिए गए थे।

उन्होंने दावा किया कि आश्रम की देखरेख कर रही महिला की अनुमति से ही जमीन खेती के लिए दी गई थी। इसके अलावा कैंटीन और कमरों का निर्माण भी उनकी सहमति से कराया गया था। बाबा हठयोगी ने आरोप लगाया कि पूर्व में कुछ लोगों ने आश्रम पर कब्जा करने की कोशिश की थी। उस समय महिला ने उनसे सहायता मांगी थी, जिसके बाद उन्होंने आश्रम पर कब्जा नहीं होने दिया।

हालांकि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले में सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना और तथ्यों के आधार पर जांच होना आवश्यक है।

नई कमेटी के गठन पर उठाए सवाल
बाबा हठयोगी ने महिला की ओर से नई कमेटी गठित किए जाने पर सवाल उठाते हुए उसकी प्रक्रिया और नियमों के पालन की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि आश्रम जैसे धार्मिक संस्थानों की संपत्ति और प्रबंधन से जुड़े निर्णय पारदर्शी तरीके से लिए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति पैदा न हो।

उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि आश्रम की जमीन, निर्माण कार्यों, प्रबंधन संबंधी दस्तावेजों और कमेटियों के गठन की प्रक्रिया की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल से ही स्पष्ट हो सकेगा कि आश्रम की संपत्ति और प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों में कितनी सच्चाई है।

आश्रम के व्यवसायीकरण पर रोक लगाने की मांग
बाबा हठयोगी ने राज्य सरकार से अमेरिकन आश्रम की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वहां कथित व्यवसायीकरण पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि आश्रमों का उद्देश्य धार्मिक, आध्यात्मिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों को बढ़ावा देना होता है। ऐसे संस्थानों की संपत्ति का उपयोग उनके निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप होना चाहिए।

उन्होंने प्रशासन से अपील की कि आश्रम से जुड़ी जमीन और अन्य संपत्तियों की स्थिति की जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएं, जिससे किसी भी संभावित अनियमितता या अवैध कब्जे की आशंका को दूर किया जा सके।

राम विशाल दास महाराज ने भी जताई चिंता
पत्रकार वार्ता में राम विशाल दास महाराज ने भी अमेरिकन आश्रम की जमीन और संपत्ति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भू-माफिया आश्रम की संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बाबा हठयोगी पर लगाए गए आरोपों को भी गलत बताया और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की।

राम विशाल दास महाराज ने कहा कि आश्रम की संपत्ति की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति को नियमों के विपरीत उस पर कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने आश्रम की देखरेख कर रहे कुछ लोगों पर निजी स्वार्थ साधने का आरोप लगाते हुए नई संस्था के गठन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें
अमेरिकन आश्रम को लेकर सामने आए आरोपों के बीच अब शासन-प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विवाद का निष्पक्ष समाधान करने के लिए आश्रम की जमीन के अभिलेखों, पूर्व और वर्तमान कमेटियों से संबंधित दस्तावेजों, निर्माण कार्यों की अनुमति तथा प्रबंधन व्यवस्था की जांच जरूरी है। साथ ही, सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

आश्रम की संपत्ति को लेकर उठे सवाल केवल प्रबंधन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धार्मिक संस्थानों की पारदर्शिता और उनकी संपत्ति के संरक्षण से भी जुड़े हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

पत्रकार वार्ता में महंत प्रेमदास, हितेश दास महाराज सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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