कुलपति से मुलाकात का समय नहीं मिलने पर पत्रकारों ने उठाए सवाल; कन्या गुरुकुल में टूटे फर्नीचर, बैठने की बदहाल व्यवस्था और कैंटीन के भोजन को लेकर छात्राओं ने जताई नाराजगी…
हरिद्वार, 11 अक्टूबर 2026।
गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय में छात्रों की 21 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आमरण अनशन छठे दिन भी जारी है। अब एक मांग और बड़ा दी गए है। छात्र एवं छात्र नेता आशु मलिक (बजरंग वाहिनी दल प्रदेश अध्यक्ष) अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं। अनशन के लगातार छह दिन बीत जाने के बाद भी समाधान नहीं निकलने से विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। वहीं, अनशनकारी आशु मलिक के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आने की बात सामने आई है, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है।

मौके पर पहुंचे जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अनस ने आशु मलिक के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने बिना भोजन के रहने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को लेकर चिंता जताई और उनकी तबीयत ठीक नहीं होने की बात कही। ऐसे में सवाल उठता है कि जब किसी छात्र को अपनी मांगों के लिए छह दिनों तक आमरण अनशन करना पड़ रहा है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन को संवाद और समाधान की दिशा में कितनी तत्परता दिखानी चाहिए।
छात्रों के हितों से जुड़ी हैं मांगें, आशु मलिक का दावा
अनशनकारी आशु मलिक ने बताया कि उनकी 21 सूत्रीय मांगें विश्वविद्यालय के छात्रों के हितों और उनकी मूलभूत सुविधाओं से संबंधित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में पर्याप्त भोजन की व्यवस्था के लिए उचित कैंटीन उपलब्ध नहीं है। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होने से दुर्गंध की समस्या बनी रहती है। वहीं, पुस्तकालय की स्थिति भी ऐसी नहीं है कि विद्यार्थी वहां शांतिपूर्वक बैठकर पढ़ाई कर सकें।

आशु मलिक ने विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पढ़ाई के लिए जिस प्रकार का वातावरण और सुविधाएं होनी चाहिए, उनका अभाव है तथा यज्ञ-हवन जैसी गतिविधियों के बीच नियमित अध्ययन की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विश्वविद्यालय प्रशासन का इस संबंध में विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
उन्होंने कुलपति के वेतन और लागू नियमों को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका दावा है कि कुलपति को वर्ष 2023 के नियमों के अंतर्गत वेतन दिया जा रहा है, जबकि विश्वविद्यालय में यूजीसी के वर्ष 2019 के नियम लागू होने चाहिए। इस संबंध में संबंधित नियमों, नियुक्ति की शर्तों और वेतन निर्धारण के आधिकारिक दस्तावेजों की जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
कुलपति से संवाद नहीं होने पर उठे सवाल
आशु मलिक ने आरोप लगाया कि इतने दिनों से अनशन जारी रहने के बावजूद कुलपति ने अब तक छात्रों से सीधे बातचीत नहीं की है। उन्होंने कुलपति के रवैये को निराशाजनक बताते हुए आरोप लगाया कि छात्रों के साथ बातचीत के दौरान मर्यादित भाषा का भी ध्यान नहीं रखा जाता। साथ कुलपति को “हिटलर” की उपाधि से सम्बोधित किया।

इस बीच, पत्रकारों को कुलपति से मुलाकात के लिए इन्तजार करवाया गया परन्तु समय नहीं मिल पाने की बात भी सामने आई। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन की पारदर्शिता और छात्रों की समस्याओं पर उसकी प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। किसी भी शैक्षणिक संस्थान में असहमति और शिकायतों का समाधान संवाद के माध्यम से होना चाहिए। विशेष रूप से तब, जब मामला विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य से जुड़ा हो।
कुलसचिव बोले—छात्रों से बातचीत के लिए विश्वविद्यालय तैयार
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सत्यदेव निगमालंकार ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह कुलपति के प्रतिनिधि के तौर पर लगातार छात्रों के संपर्क में हैं। उनके अनुसार, छात्रों को अनशन समाप्त कर उचित तरीके से वार्ता करने का आश्वासन दिया गया है, ताकि उनकी जायज मांगों का विश्वविद्यालय स्तर पर समाधान निकाला जा सके।
कुलसचिव ने कहा कि ये विश्वविद्यालय के अपने छात्र हैं और उनके भविष्य की चिंता करना विश्वविद्यालय का कर्तव्य है। उन्होंने सकारात्मक बातचीत के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं को उचित तरीके से सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
परन्तु दूसरी तरफ वही पुरे छात्रावास में उनके सामने के दरवाजे से कार्यालय में जाने के बजाये खिड़की से कार्यालय में आने जाने का आरोप भी है जिसकी विडिओ वायरल से पुस्टि भी होती है
प्रशासन की ओर से बातचीत का आश्वासन सामने आने के बावजूद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वार्ता कब होगी और छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय कब लिया जाएगा।
कन्या गुरुकुल पहुंचने पर सामने आईं छात्राओं की शिकायतें
विश्वविद्यालय में छात्रों की समस्याओं की जानकारी जुटाने के बाद पत्रकार कन्या गुरुकुल पहुंचे। यहां छात्राओं व महिला पत्रकार के बीच बातचीत के दौरान शैक्षणिक और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने आईं। छात्राओं ने कक्षाओं में टूटे हुए फर्नीचर और बैठने की उचित व्यवस्था नहीं होने, बुल्डिंग के अंदर की मरम्मत,शौचालय जैसी समस्या बताई। उनके अनुसार, कक्षाओं में पढ़ाई के लिए आवश्यक सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

कैंटीन के भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी छात्राओं ने नाराजगी जताई। छात्राओं की शिकायतों के अनुसार, उन्हें मिलने वाला भोजन गुणवत्तापूर्ण नहीं है। यदि ये शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह विद्यार्थियों की सुविधा, स्वास्थ्य और शैक्षणिक वातावरण से जुड़ा गंभीर विषय है, जिस पर संस्थान प्रबंधन को तत्काल ध्यान देना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जब पत्रकारों ने संबंधित कन्या गुरुकुल अपर – प्रशासनिक अधिकारी से कक्षाओं और कैंटीन की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराने का अनुरोध किया, तो उन्हें निरीक्षण नहीं कराया गया। पत्रकारों के अनुसार, उन्हें संतोषजनक जवाब भी नहीं मिला। महिला पत्रकार ने प्रशासनिक प्रमुख सुरेखा राणा से फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनके मुताबिक कार्यालय की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
इस घटनाक्रम ने पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यदि संस्थान में सुविधाएं संतोषजनक हैं, तो संबंधित अधिकारियों को निरीक्षण कराने और शिकायतों का तथ्यात्मक जवाब देने में संकोच क्यों होना चाहिए? वहीं, यदि कमियां मौजूद हैं, तो उन्हें स्वीकार कर सुधार की समयबद्ध कार्ययोजना बनाना ही विद्यार्थियों के हित में होगा। इस मामले में संबंधित प्रशासनिक अधिकारी का पक्ष भी सामने आना आवश्यक है।
लाखों रुपये फीस लेने के आरोप, सुविधाओं पर जवाबदेही जरूरी
कन्या गुरुकुल की छात्राओं से बातचीत के दौरान यह दावा भी सामने आया कि प्रवेश और सुविधाओं के नाम पर उनसे एडमिशन के समय लाखों रुपये लिए गए हैं। छात्राओं के मुताबिक इसके लिए उन्होंने आशु मालिक को लिखित में अपनी जानकारी भी साझा की थे जोकि आशु मालिक ने पत्रकारों के साथ भी साझा की है।
अहम सवाल
यदि विद्यार्थियों से बड़ी धनराशि शुल्क के रूप में ली जा रही है, तो उसके अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ परिसर, सुरक्षित एवं व्यवस्थित कक्षाएं, पौष्टिक भोजन और अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
फीस लेने और सुविधाएं उपलब्ध कराने के बीच किसी भी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर विश्वविद्यालय प्रबंधन को जवाबदेही तय करनी चाहिए। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को यह जानने का अधिकार है कि उनसे लिए गए शुल्क के बदले कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा शिकायतों के निवारण के लिए क्या व्यवस्था है।
गुरुकुल की मर्यादा केवल नाम से नहीं, शिक्षा की गुणवत्ता से कायम रहती है
गुरुकुल कांगड़ी का नाम भारतीय शिक्षा, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहा है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान से समाज की अपेक्षा केवल शिक्षा प्रदान करने की नहीं, बल्कि अनुशासन, नैतिकता, स्वच्छता, पारदर्शिता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आदर्श प्रस्तुत करने की भी होती है।
ऐसे में यदि छात्रों को बुनियादी सुविधाओं के लिए अनशन करना पड़े और छात्राओं को कक्षाओं, फर्नीचर, भोजन तथा स्वच्छता जैसी समस्याओं की शिकायत करनी पड़े, तो इन मुद्दों को गंभीरता से लेना आवश्यक है। इन शिकायतों को केवल संस्थान की छवि का प्रश्न मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। वास्तविक प्रतिष्ठा तभी कायम रहती है, जब विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और सम्मानजनक वातावरण मिले।
विश्वविद्यालय प्रशासन से उठे प्रमुख सवाल
अब विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कुछ महत्वपूर्ण सवाल हैं—
- छात्रों की 21 सूत्रीय मांगों पर अब तक क्या ठोस कार्रवाई की गई है?
- आमरण अनशन कर रहे आशु मलिक के स्वास्थ्य को देखते हुए तत्काल संवाद और समाधान की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
- विश्वविद्यालय में कैंटीन, शौचालय और पुस्तकालय की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
- कन्या गुरुकुल की कक्षाओं में टूटे फर्नीचर और बैठने की व्यवस्था से संबंधित शिकायतों की जांच कब होगी?
- कैंटीन के भोजन की गुणवत्ता की जांच कौन करेगा और छात्राओं को संतोषजनक भोजन कब उपलब्ध कराया जाएगा?
- फीस और सुविधाओं से संबंधित शिकायतों की समीक्षा कर पारदर्शी जानकारी विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को कब दी जाएगी?
- कुलपति के वेतन निर्धारण से जुड़े आरोपों पर लागू नियमों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर स्थिति कब स्पष्ट की जाएगी?
- पत्रकारों को संस्थान की सुविधाओं का निरीक्षण कराने और संबंधित अधिकारियों से जवाब प्राप्त करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था कब उपलब्ध होगी?
इन सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि दस्तावेजों, निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई से मिलना चाहिए।
विद्यार्थियों का भविष्य सर्वोपरि, तत्काल समाधान की मांग
गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय और कन्या गुरुकुल से जुड़ी इन शिकायतों को देखते हुए आवश्यकता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन एक निष्पक्ष जांच समिति गठित करे, छात्रों की 21 सूत्रीय मांगों पर बिंदुवार स्थिति स्पष्ट करे और छात्राओं की ओर से उठाई गई समस्याओं का मौके पर निरीक्षण कराए। कैंटीन के भोजन, शौचालयों की सफाई, कक्षाओं के फर्नीचर, पुस्तकालय की सुविधाओं तथा शुल्क के बदले उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की समीक्षा की जानी चाहिए।
साथ ही, आमरण अनशन पर बैठे छात्र के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सकीय निगरानी और तत्काल संवाद सुनिश्चित किया जाना चाहिए। छात्रों की मांगों पर वार्ता के लिए स्पष्ट समयसीमा तय हो और जिन मांगों को स्वीकार किया जाए, उनके क्रियान्वयन की लिखित कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए।
“बड़ा सवाल यह नहीं है कि आवाज उठाने वाले छात्र कौन हैं,” बल्कि यह है कि- उनकी समस्याओं का समाधान कब होगा ? शिक्षा के मंदिर में विद्यार्थियों को अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने की नौबत नहीं आनी चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों की बात सुनें, शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएं और भविष्य को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाएं।
गुरुकुल की गरिमा बनाए रखने का सबसे प्रभावी रास्ता यही है कि यहां शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सुरक्षा, सुविधाओं की पारदर्शिता और प्रशासन की जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता बने। समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए गए, तो न केवल विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि इस प्रतिष्ठित संस्थान की प्रतिष्ठा भी और मजबूत होगी।
MH7news – अब देखना यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन गंभीर सवालों पर केवल आश्वासन देता है या विद्यार्थियों के हित में ठोस कार्रवाई कर एक सकारात्मक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।