रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा, आयुर्वेद के वैज्ञानिक विस्तार पर जोर

हरिद्वार, 24 सितम्बर।
ऋषिकुल परिसर, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हरिद्वार में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस उत्साह, उमंग और गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा, वैज्ञानिक महत्व, स्वस्थ जीवनशैली और वर्तमान समय में इसकी बढ़ती उपयोगिता पर वक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय आयुष मंत्री श्री मदन कौशिक उपस्थित रहे

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।

आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर
मुख्य अतिथि आयुष मंत्री श्री मदन कौशिक ने अपने संबोधन में आयुर्वेद को भारतीय ज्ञान और चिकित्सा परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर बताया। उन्होंने आयुर्वेद के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा इसकी उपयोगिता को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आयुर्वेद के वैज्ञानिक पक्ष को समझते हुए चिकित्सा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने का आह्वान किया।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ जीवनशैली और आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने में विश्वविद्यालय की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

स्टाइपेंड और पदोन्नति की मांगें भी उठीं
ऋषिकुल परिसर की निदेशक प्रोफेसर ओ. पी. सिंह ने आयुर्वेद को भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

इस अवसर पर प्रोफेसर ओ. पी. सिंह ने आयुष मंत्री के समक्ष पीजी छात्रों एवं प्रशिक्षु छात्रों के स्टाइपेंड तथा शिक्षकों की पदोन्नति से संबंधित मांगें भी रखीं। उन्होंने आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपेक्षा व्यक्त की।

पोस्टर से रंगोली तक, प्रतिभाओं ने बिखेरे रंग
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें पोस्टर प्रतियोगिता, पौष्टिक आहार प्रतियोगिता, रील निर्माण प्रतियोगिता और रंगोली प्रतियोगिता सहित अनेक गतिविधियां शामिल रहीं।

छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रतियोगिताओं में भाग लिया और अपनी रचनात्मकता, प्रतिभा तथा आयुर्वेद के प्रति समझ का प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के साथ प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

बड़ी संख्या में शिक्षक, चिकित्सक और विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल, मेला अधिकारी कुंभ डॉ. मनीष दत्त, ऋषिकुल परिसर की निदेशक प्रोफेसर ओ. पी. सिंह, प्रोफेसर खेमचंद शर्मा, प्रोफेसर अजय गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर रूबी रानी अग्रवाल, प्रोफेसर सीमा जोशी, प्रोफेसर विशाल वर्मा, प्रोफेसर सुरेश, प्रोफेसर संजय सिंह, प्रोफेसर गुंजन शर्मा, प्रोफेसर संजय त्रिपाठी, डॉ. रीना दीक्षित, डॉ. शोभित वार्ष्णेय, डॉ. अंजली वर्मा, डॉ. पारुल शर्मा, डॉ. भावना मित्तल, डॉ. ज्ञानेंद्र दत्त शुक्ला, डॉ. शुची मित्रा, डॉ. वेदभूषण शर्मा, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. श्वेता शुक्ला, डॉ. तरुण उपाध्याय, डॉ. शशिकांत तिवारी, डॉ. शैलेंद्र प्रधान, डॉ. महेश चंद्रा सहित विश्वविद्यालय एवं ऋषिकुल परिसर के शिक्षक, चिकित्सक, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

कार्यक्रम के समापन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस का यह आयोजन परिसर में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता और उत्साह बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय चिकित्सा परंपरा के प्रति गौरव की भावना को मजबूत करने वाला रहा। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान और नवाचार से जोड़कर स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई संभावनाओं को विकसित किया जा सकता है।

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