UIIDB के जरिए सरकारी भूमि और संपत्तियों को PPP व लीज पर देने को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल, जॉर्ज एवरेस्ट से लेकर अलकनंदा होटल तक के मामलों का किया जिक्र…
हरिद्वार, 16 सितम्बर ।
उत्तराखंड की बेशकीमती सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों को लीज तथा पीपीपी मॉडल के जरिए निजी संस्थाओं को दिए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। हरिद्वार में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य की बहुमूल्य संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया में पारदर्शिता, उचित मूल्यांकन और जनहित को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अमन गर्ग ने कहा कि कांग्रेस विकास और निवेश के खिलाफ नहीं है, लेकिन सरकारी जमीन और जनता की संपत्ति से जुड़े फैसलों में पूरी पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने मांग की कि सरकार सार्वजनिक रूप से बताए कि कौन-सी सरकारी जमीन या संपत्ति किस संस्था को, कितने क्षेत्रफल में, कितने वर्षों के लिए और किन आर्थिक शर्तों पर दी जा रही है।
UIIDB को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड निवेश एवं आधारिक संरचना विकास बोर्ड (UIIDB) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। आधिकारिक UIIDB वेबसाइट के अनुसार बोर्ड का गठन 2023 के कानून के तहत हुआ है और उसका घोषित उद्देश्य बुनियादी ढांचा विकास तथा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) को बढ़ावा देना है। बोर्ड की वेबसाइट पर भूमि नीलामी संबंधी दिशा-निर्देश भी उपलब्ध हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि इसी व्यवस्था के माध्यम से राज्य की बेशकीमती सरकारी जमीनों और संपत्तियों को लंबे समय की लीज अथवा PPP मॉडल पर निजी संस्थाओं को उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। पार्टी ने सरकार से सभी बड़े भूमि एवं संपत्ति आवंटनों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
जॉर्ज एवरेस्ट प्रकरण बना कांग्रेस के निशाने पर
प्रेस वार्ता में मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मामला प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि करीब 142 एकड़ भूमि को 15 वर्ष की अवधि के लिए लगभग एक करोड़ रुपये वार्षिक शुल्क पर राजस एयरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया।
इस मामले में उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जनवरी 2026 के फैसले में दर्ज किया कि 142 एकड़ जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट पर्यटन विभाग की संपत्ति थी और सफल बोलीदाता को वैध निविदा प्रक्रिया के बाद भूमि लीज पर दी गई थी। अदालत के रिकॉर्ड में यह भी है कि बोली 2022 में हुई और अनुबंध 2023 में हुआ।
वहीं, इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने कंपनी के संबंधों और निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्टों में तीन बोलीदाता कंपनियों और आचार्य बालकृष्ण के कारोबारी संबंधों को लेकर विवाद का उल्लेख हुआ है। सरकार की ओर से प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया गया है।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र के विकास पर एडीबी ऋण से करीब 23.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बाद संपत्ति को लीज पर देने की आर्थिक शर्तें क्या हैं। इस संबंध में प्रकाशित रिपोर्टों में एडीबी ऋण और क्षेत्र के विकास का उल्लेख है।
अलकनंदा होटल और अन्य सरकारी संपत्तियों का भी मुद्दा
कांग्रेस ने हरिद्वार के अलकनंदा होटल सहित अन्य सरकारी संपत्तियों को PPP मॉडल पर देने को लेकर भी सवाल उठाए। यह तथ्य सरकारी UIIDB की वेबसाइट पर मौजूद निविदा से पुष्ट होता है, जहां “Redevelopment of Alaknanda Hotel at Haridwar in PPP Mode on DBFOT basis” के लिए RFP सूचीबद्ध है। इसी सूची में ऋषिकेश PWD गेस्ट हाउस के PPP मॉडल पर पुनर्विकास और नैनीताल के पटवाडांगर में प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट के लिए भूमि आवंटन संबंधी निविदा भी दर्ज है।
कांग्रेस ने कहा कि इन परियोजनाओं में जमीन की कीमत, लीज अवधि, निवेश, सरकार को मिलने वाला राजस्व, निविदा में शामिल कंपनियां और भविष्य में संपत्ति पर सरकार के अधिकार जैसी तमाम जानकारियां सार्वजनिक होनी चाहिए।
1200 एकड़ से अधिक भूमि के प्रस्तावों का दावा
प्रेस नोट में कांग्रेस ने दावा किया कि विभिन्न विभागों की करीब 1200 एकड़ यानी लगभग 6000 बीघा भूमि से जुड़े प्रस्ताव मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंच चुके हैं, जबकि हजारों बीघा भूमि के अन्य प्रस्ताव विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि ये आंकड़े सरकारी रिकॉर्ड के अनुरूप हैं तो सरकार को इन प्रस्तावों की पूरी सूची सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि जनता को पता चल सके कि राज्य की कौन-सी जमीन किस उद्देश्य के लिए प्रस्तावित है।
‘भूमि माफिया के सहारे प्रदेश चलाने की तैयारी’ का आरोप
वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुरली मनोहर एवं महेश प्रताप राणा ने आरोप लगाया कि प्रदेश की बेशकीमती जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की नीति आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर सवाल खड़े कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियां जनता की संपत्ति हैं और इनके इस्तेमाल अथवा हस्तांतरण में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नैनीताल, देहरादून, टिहरी और हरिद्वार सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में सरकारी भूमि एवं संपत्तियों से जुड़े कई प्रस्ताव सामने आ रहे हैं। इसी तरह के आरोपों पर आज प्रकाशित रिपोर्टों में भी कांग्रेस नेताओं द्वारा सरकारी भूमि और संपत्तियों को निजी संस्थाओं को देने पर सवाल उठाए जाने का उल्लेख है।
जनहित की परियोजनाओं पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस ने दावा किया कि कुछ ऐसी सरकारी जमीनों और संपत्तियों को भी निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है, जिनका इस्तेमाल राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय न्यायालय विज्ञान विश्वविद्यालय तथा अन्य जनहितकारी संस्थानों के लिए किया जा सकता है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि किसी सरकारी जमीन को निजी परियोजना के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है तो सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि उसके पीछे सार्वजनिक हित का आकलन किस आधार पर किया गया।
‘सरकारी संपत्ति जनता की है’—कांग्रेस
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकारी जमीन केवल सरकार की संपत्ति नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की संपत्ति है। इसलिए इसके इस्तेमाल अथवा लीज से जुड़े निर्णयों में आने वाली पीढ़ियों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि—
सरकारी जमीनों और संपत्तियों की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए।
प्रत्येक संपत्ति का स्वतंत्र बाजार मूल्यांकन कराया जाए।
लीज अथवा PPP की अवधि और आर्थिक शर्तें सार्वजनिक की जाएं।
निविदा में शामिल सभी कंपनियों और उनके वास्तविक हितधारकों की जानकारी सामने लाई जाए।
सरकारी संपत्ति से सरकार और जनता को होने वाले आर्थिक लाभ का स्पष्ट विवरण दिया जाए।
जनहित की परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित जमीनों की स्थिति भी सार्वजनिक की जाए।
‘सड़क से सदन तक उठाएंगे मुद्दा’
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अमन गर्ग ने कहा कि सरकारी संपत्तियों के विकास का कांग्रेस विरोध नहीं करती, लेकिन जनता की संपत्ति से जुड़े किसी भी निर्णय में पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को आगे भी उठाएगी और जरूरत पड़ने पर इसे सड़क से लेकर सदन तक ले जाया जाएगा।
प्रेस वार्ता में महेश प्रताप सिंह राणा, वरुण बालियान, अंजू मिश्रा, तीर्थ पाल, रवि , राजवीर सिंह , रचना शर्मा , ललित भार्गव , हिमांशु , अकरम अंसारी ,सहाबुद्दीन अंसारी , सतेंद्र वर्मा ,आशीष पंवार , बीपीएस ,तेजियान सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आने वाले समय में बढ़ सकता है राजनीतिक दबाव
सरकारी जमीनों और संपत्तियों के PPP तथा लीज मॉडल पर इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवाल आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार की आधिकारिक नीति UIIDB के माध्यम से PPP और निवेश आधारित बुनियादी ढांचा विकास को बढ़ावा देने की है।
ऐसे में असली सवाल अब सरकारी संपत्तियों के निजी उपयोग के विरोध या समर्थन से आगे बढ़कर प्रक्रिया की पारदर्शिता, आर्थिक शर्तों, सार्वजनिक लाभ और दीर्घकालिक जवाबदेही का है। कांग्रेस ने इन्हीं बिंदुओं पर सरकार से विस्तृत जवाब और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।