“गंगा जल के आचमन और दर्शन मात्र से नष्ट हो जाते हैं समस्त पाप” — पंडित संजय कृष्ण महाराज…
हरिद्वार, 8 अगस्त।
श्री अखंड परशुराम अखाड़े के संयोजन में जिला कारागार रोशनाबाद में आयोजित की जा रही संगीतमय गंगा कथा में शनिवार को मां गंगा की महिमा, गंगा भक्ति और धार्मिक परंपराओं से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। कथा व्यास पंडित संजय कृष्ण महाराज ने मां गंगा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सनातन संस्कृति की जीवनधारा हैं।
पंडित संजय कृष्ण महाराज ने कहा कि मां गंगा की महिमा अनंत है। गंगा जल का आचमन और मां गंगा के दर्शन मात्र से ही मनुष्य के समस्त पाप नष्ट होने का मार्ग प्रशस्त होता है और उसे कल्याण की दिशा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि मां गंगा के प्रति श्रद्धा और भक्ति मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है तथा उसे सत्य, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
विद्यापति और राजा पुण्यकीर्ति की गंगा भक्ति का किया वर्णन
कथा के दौरान पंडित संजय कृष्ण महाराज ने श्रद्धालुओं को विद्यापति की गंगा भक्ति, राजा पुण्यकीर्ति की गंगा साधना और मां सीता की गंगा आराधना से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का श्रवण कराया। उन्होंने बताया कि भारतीय धार्मिक परंपराओं में मां गंगा का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है और विभिन्न युगों में संतों, राजाओं तथा भक्तों ने गंगा को अपनी आस्था और साधना का केंद्र माना है।
उन्होंने काशी के गंगा महोत्सव और गंगा पूजन की धार्मिक विधि के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को बताया कि गंगा पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, जल और जीवन के प्रति सम्मान व्यक्त करने की भारतीय परंपरा भी है।
“गंगा जल पवित्र होने के साथ औषधीय भी” — महामंडलेश्वर संतोषानंद महाराज
इस अवसर पर महामंडलेश्वर संतोषानंद महाराज ने श्रद्धालु भक्तों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि जीवनदायिनी मां गंगा का जल केवल आध्यात्मिक दृष्टि से पवित्र ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भी युक्त माना जाता है। उन्होंने कहा कि जिला कारागार में गंगा कथा का आयोजन इस बात का प्रतीक है कि धर्म और आध्यात्मिकता किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सभी के लिए हैं।
उन्होंने कहा कि मां गंगा की कृपा और आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। धार्मिक कथा मनुष्य को आत्मचिंतन का अवसर देती है और उसे अपने जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने की प्रेरणा प्रदान करती है।
कैदियों के हृदय में भक्ति और सदाचार जगाना उद्देश्य — अधीर कौशिक
श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि अखाड़ा समाज में धर्म, संस्कार और सेवा के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहा है। जिला कारागार में गंगा कथा के आयोजन का मुख्य उद्देश्य बंदियों के भीतर भक्ति, सदाचार, संयम और सकारात्मक सोच के भाव को जागृत करना है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, आध्यात्मिक चिंतन उसे अपने भीतर झांकने और बेहतर जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देता है। कथा के माध्यम से बंदियों को भारतीय संस्कृति, धर्म और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
धार्मिक आयोजनों से कैदियों को मिल रही सकारात्मक दिशा — जेल अधीक्षक
जेल अधीक्षक मनोज आर्या ने कहा कि जेल प्रशासन का प्रयास है कि कारागार में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को सकारात्मक दिशा प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि गंगा कथा के श्रवण से बंदियों को संयम, अनुशासन, नैतिकता और सदाचार की प्रेरणा मिल रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से कारागार का वातावरण भी सकारात्मक बनता है और बंदियों को अपने जीवन में सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
संत-महात्माओं सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद
गंगा कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर स्वामी महाबलेश्वर, स्वामी संतोषानंद देव, स्वामी रूद्रानंद, स्वामी कार्तिक गिरि, डॉ. दिनेश बाली, ऋषि शर्मा, रोहित शर्मा, हिमांशु भारद्वाज, संगीता, वंदना, कुलदीप शर्मा, सुमित कुमार, अमित शर्मा और बलविंदर चौधरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु तथा जिला कारागार के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
गंगा कथा के दौरान धार्मिक प्रसंगों, भक्ति भाव और आध्यात्मिक संदेशों से कारागार परिसर भक्तिमय नजर आया। कथा के माध्यम से जहां श्रद्धालुओं ने मां गंगा की महिमा का श्रवण किया, वहीं बंदियों को भी आत्मचिंतन, संस्कार, संयम और सकारात्मक जीवन की प्रेरणा मिली।