देहरादून, 27 अप्रैल।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मसूरी पर्यटन सीजन के दौरान सड़कों पर अवैध पार्किंग से लगने वाले भीषण जाम को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश पारित किए हैं। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने राज्य सरकार को इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

न्यायालय ने मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि वे दो सप्ताह के भीतर सचिव शहरी विकास, सचिव पर्यटन और सचिव गृह की एक हाई पावर कमेटी गठित करें। यह समिति पूरे मामले की जांच कर 8 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करेगी।

खंडपीठ ने यह भी कहा कि समाधान सामने आने के बाद उस पर जनसुनवाई के लिए विज्ञापन जारी किया जाए। जनसुनवाई में याचिकाकर्ता के साथ मसूरी के डॉक्टर, शिक्षक, होटल एसोसिएशन के सदस्य, कैब यूनियन, छात्र, स्थानीय निवासी तथा अन्य संबंधित लोगों की बैठक आयोजित की जाए। बैठक में लिए गए निर्णय राज्य सरकार को भेजे जाएंगे, जिन पर सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी।

यह जनहित याचिका मसूरी निवासी प्रवेश पंत द्वारा दायर की गई थी। याचिका में कहा गया कि मसूरी देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, लेकिन लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम के कारण शहर की पहचान प्रभावित हो रही है। इससे स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों, मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस, स्कूल के बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

याचिका में बताया गया कि जाम का मुख्य कारण पार्किंग विहीन होटल और होम स्टे हैं, जहां पार्किंग सुविधा न होने के कारण वाहन सड़क किनारे खड़े कर दिए जाते हैं। दूसरा बड़ा कारण नगर पालिका द्वारा विभिन्न सड़कों पर पार्किंग संचालन भी बताया गया है।

जाम से सबसे अधिक प्रभावित मार्गों में पिक्चर पैलेस से सिविल अस्पताल मार्ग, लंढौर से घंटाघर मार्ग, घंटाघर से वाइनबर्ग ऐलन मार्ग, कैमल्स बैक रोड से मॉल रोड, लाइब्रेरी चौक, लाइब्रेरी चौक से आईटीबीपी रोड तथा जीरो पॉइंट झड़ीपानी मार्ग शामिल हैं।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि मसूरी की मल्टी स्टोरी पार्किंग खाली पड़ी रहती है, जबकि वाहन सड़कों के किनारे खड़े किए जाते हैं, जिससे जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है।

इस मामले में पहले भी सचिव शहरी विकास, आईजी ट्रैफिक, जिलाधिकारी, एसएसपी, कोतवाली मसूरी तथा अधिशासी अधिकारी नगर पालिका मसूरी को कई प्रत्यावेदन दिए गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।

अब हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद मसूरीवासियों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

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