बोर्ड की लापरवाही, 70 वर्ष पुराने फाॅन्ट में दे दिया उर्दू टेट का पेपर
सोलन

सोलन.हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला अपनी लापरवाही हमेशा सुर्खियों में रहता है। ताजा मामला उर्दू भाषा के टेट का प्रश्नपत्र का है। टेट परीक्षा का प्रश्नपत्र, जिस अरबी फांट में परीक्षार्थियों को थमा दिया वह करीब 70 वर्ष पुराना फॉन्ट है।

देश में उर्दू भाषा में तालिम देने वाली कोई भी यू्निवर्सिटी या इंस्टीट्यूट इस फाॅन्ट का इस्तेमाल नहीं करता। भारत में जो वर्तमान में उर्दू पढ़ा और लिखा जा रहा है उसमें खत-ए-नतलीक का इस्तेमाल होता है। ऐसे में परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र समझ में ही नहीं आया। इससे परीक्षा देने वालों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। उर्दू लैंग्वेज टीचर एसोसिएशन सोलन के सदस्यों ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से मांग की है कि इस टेट परीक्षा को दोबारा लिया जाए या सभी को ग्रेस मार्क्स दिए जाएं।

एसोसिएशन की सदस्य परीक्षार्थी सुनीता, दानिश, सोनिया अत्रि, ममता, कृष्णा, शांता, आशिमा ने बताया कि स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला की लापरवाही के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 17 सितंबर को उर्दू भाषा की टेट परीक्षा चार जोन सोलन, धर्मशाला, ऊना मंडी में आयोजित की। इसमें 150 प्रश्न पूछे गए थे। इसमें 30 प्रश्न जनरल नॉलेज के थे, जिन्हें उर्दू के अलावा अंग्रेजी में भी पूछे गए थे। उनके उत्तर देने में कोई परेशानी नहीं हुई। टेट की परीक्षा में जो फांट इस्तेमाल किया गया वह देश के किसी भी उर्दू शिक्षण संस्थान या यूनिवर्सिटी में नहीं पढ़ाया जाता है। उर्दू भाषा तीसरी भाषा के विकल्प के रूप में स्कूलों में पिछले 8-10 वर्षों से पढ़ाई जा रही है। इसके लिए बाजार में कोई पुस्तक भी अभी तक उपलब्ध नहीं थी।

अधूरे पेपर छोड़ लौटे

120 नंबर के प्रश्न में जो फाॅन्ट इस्तेमाल किया गया है, उसे जानने वाले लोग हिमाचल में ही गिने चुने होंगे। इसलिए परीक्षा देने वाले आधे-अधूरे पेपर छोड़ कर परीक्षा हाल से लौटे।

शिकायत नहीं आई

हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला की पीआरओ अंजु पाठक से जब इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि उर्दू टेट प्रश्नपत्र को लेकर अभी कोई शिकायत नहीं आई है। यदि कोई लिखित शिकायत आती है तो उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

पढ़ने में अंदाजा लगाना होगा : डॉ. जोगराज

मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार के सोलन स्थित उर्दू शिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र से हाल ही में सेवानिवृत हुए प्रिंसिपल डॉ. जोगराज ने बताया कि लिपियां अरब, ईरान, सिंध से अपने स्वरूप को बदलती हुई भारत में पहुंची है। भारत में खत-ए- नतलीक का इस्तेमाल होता है, जो वैज्ञानिक लिपि है। इसी भाषा में उर्दू पढ़ा और पढ़ाया जा रहा है। करीब 70 वर्षों पहले अरबी फाॅन्ट का इस्तेमाल होता था, जिसमें टेट पेपर आया था।

डॉ. जोगराज ने इसे पढऩे के लिए तो मुझे अंदाजा लगाना होगा। मदरसों के मौलबी इस फांट को आसानी से पढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि खत-ए- नतलीक लिपि आजकल उर्दू यूनिकोड और इंपेज में चल रही है और इसी में प्रश्न पूछे जाने चाहिए थे, ये परीक्षा देने वालों के साथ नाइंसाफी है। उन्होंने कहा कि खत-ए-नतलीक का मतलब ही बिगड़े रूप को खूबसूरत बनाना है। अभ्यर्थियों ने प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से इस पेपर को रद्द करने की मांग की है या िफर छात्रों को ग्रेस नंबर दिए जाए।

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