सुप्रीम कोर्ट : दहेज के मामलों में तत्काल गिरफ्तारी नहीं, 54 दिन बाद भी पुलिस अंजान
जयपुर.

जयपुर. दहेज प्रताड़ना यानी आईपीसी की धारा 498-ए के तहत दर्ज मामलों में पति या ससुराल वालों की तत्काल गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट रोक लगा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को कहा था कि दहेज के मामलों को पहले जिला स्तर पर परिवार कल्याण कमेटियों के पास भेजा जाएगा। ये कमेटियां एक माह में रिपोर्ट देंगी, उसी आधार पर गिरफ्तारी होगी। आदेश के 54 दिन बाद भी पुलिस पुराने तरीके से ही काम कर रही है। थानों में पुलिस अफसरों को पता ही नहीं है कि करना क्या है। दरअसल, यह स्थिति पुलिस मुख्यालय की वजह से खड़ी हुई है। मुख्यालय से थानों को इन मामलों में कार्रवाई के नए दिशा-निर्देश अभी तक दिए ही नहीं गए हैं।

उधर, कोर्ट के आदेश पर राजस्थान स्टेट लीगल सर्विस ऑथोरिटी 35 ज्यूडिशियल जिलों में 103 कमेटियां गठित कर चुका है। इसकी जानकारी पुलिस को है। लेकिन, पुलिस मुख्यालय से यह आदेश पहुंचा नहीं है कि ऐसे मामलों में उन्हें करना क्या है।

राज्य पुलिस की अपराध शाखा के एडीजी पंकज कुमार सिंह का कहना है कि कमेटियों के गठन की जैसे ही सूचना आएगी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना में केसेज को वहां भेजना शुरू कर देंगे। उधर, गृह विभाग का कहना है कि एक-दो दिन में दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।

498 ए : दहेज के 47% मामलों में एफआर

- दहेज के अधिकतर मामलों में 498 ए का गलत इस्तेमाल हो रहा है। 47% मामले एफआर के साथ बंद हो जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे देखते हुए 27 जुलाई को नए दिशा-निर्देश जारी किए।

- सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर महिला जख्मी है या फिर प्रताड़ना की वजह से मृत्यु हो गई है तो फिर वह केस इस गाइडलाइन से बाहर होगा। गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं होगी।

कोई निर्देश नहीं मिले : थाना प्रभारी

भास्कर ने इस संबंध में जोधपुर में महिला थाना प्रभारी (पश्चिम) पाना चौधरी, महिला थाना प्रभारी (जोधपुर पूर्व) निशा भटनागर, उदयपुर महिला थाना प्रभारी चेतना भाटी एवं कोटा महिला थाना प्रभारी राम सिंह से बात की तो उन्होंने बताया कि मुख्यालय से कोई निर्देश नहीं मिले हैं। हम ये केस कमेटियों को नहीं भेज रहे हैं। रालसा के सदस्य सचिव एस.के.जैन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एसएलपी (क्रिमिनल) नंबर-2013 ऑफ 2017 (राजेश शर्मा एवं अन्य बनाम स्टेट यूपी) में पारित आदेश की अनुपालना में प्रदेश के सभी जिलों में परिवार कल्याण कमेटियों का गठन किया गया है। 35 ज्यूडिशियल जिलों में 103 कमेटियों का गठन किया है। जयपुर में तीन कमेटियां बनाई गई हैं।

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