यहां चंद मिनटों में 40 घर गंगा में डूबे, सामान बचाने का भी नहीं मिला समय
कहलगांव/पीरपैंती (भागलपुर)

कहलगांव/पीरपैंती (भागलपुर).पीरपैंती प्रखंड के रानी दियारा गांव में बुधवार की रात भीषण कटाव शुरू हो गया। देखते ही देखते रात में 13 व गुरुवार को दिन में 27 सहित कुल 40 घर गंगा में समा गए। ग्रामीणों ने बताया कि कटाव इतना तेज था कि हमलोगों को पता भी नहीं चला। देखते ही देखते 40 घर गंगा में समा गये। प्रशासन व जल संसाधन विभाग द्वारा अब तक कटावरोधी कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में रोष है।

ग्रामीणों का आरोप है कि अगर समय रहते कटावरोधी कार्य कराया गया होता तो आज यह स्थिति नहीं आती और दर्जनों बेघर नहीं होते। ग्रामीण घर छोड़ सुरक्षित स्थान पर भाग रहे हैं। अनुमंडल पदाधिकारी अरुणाभ चन्द्र वर्मा ने बताया कि कटाव की सूचना मिली है। मैंने पीरपैंती के सीओ को रानी दियारा भेजा है। क्षति का आकलन कर जल्द ही राहत कार्य शुरू किया जाएगा।

नाव नहीं रहने के कारण गोढ़ियारी में एक वृद्ध ने घर में ही तोड़ा दम

बाढ़ के पानी के बीच ग्रामीण इलाकों में बाढ़ की स्थिति अब भी भयावह बनी हुई है। बाढ़ के पानी में वृद्धि के बीच गुरुवार को हुई झमाझम बारिश के बाद बाढ़ पीड़ितों की स्थिति बदहाल हो गई। पानी नहीं घटने के बीच आठ दिन बाद भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति भयावह बनी हुई है। शहर से सटे बहादुरपुर प्रखंड के चांडी गांव व हनुमाननगर के गोढ़ियारी गांव व डिहाली पंचायत के लोग बाढ़ का कहर झेल रहे हैं। गुरुवार को भी यहां पानी घटने का नाम नहीं ले रहा है। लोगों की आवाजाही मुख्य सड़क से कट चुकी है। प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था समुचित रूप से नहीं किए गए हैं। इस बीच गुरुवार सुबह एक वृद्ध की मौत भी इलाज के बिना हो गई। वहीं प्राथमिक विद्यालय चांडी में एक दिन पहले से बच्चों को खिचड़ी मिलना शुरू हुआ है।

इक्का-दुक्का लोगों को ही पॉलिथीन बांटी गई। दर्जनों लोगों को कोई देखने व पूछने भी नहीं आया है। बात अगर फसल की करते तो, दस प्रखंडों का जायजा लेकर सप्ताहभर पूर्व कृषि विभाग की ओर से सरकार को रिपोर्ट भेजा गया था कि 20 हजार 943.4 हेक्टेयर में धान और मक्का डूबा है, उस दौरान बहादुरपुर, हनुमाननगर सिंहवाड़ा आदि अंचलों को नहीं जोड़ा गया था अब स्थिति भयावह है। आधा दर्जन अंचल बाढ़ की चपेट में आ गई है। यहां भी कई हेक्टेयर में फसल डूबी है। लोगों की माने तो प्रशासन की गाड़ी आते हैं और चले जाते हैं। दवा की व्यवस्था नहीं है। धान व सब्जी का फसल अधवारा -नीमा नदी में आई बाढ़ के पानी में डूब गया। लावा टोला, मस्तफापुर, धनैला, भरौल, तारालाही, मोहम्मदपुर, ओझौल आदि न जाने कितने ही गांवों के लिए बाढ़ का कहर है।

कर्ज लेकर धान की खेती की, डूब गई फसल

मो. महबूब व मो. चांद ने कहा पांच रुपये ब्याज की दर कर्ज पर रुपये लेकर धान की खेती की। अधवारा-नीमा नदी में बाढ़ का पानी आने से फसल डूब गई। चाण्डी गांव की अजमेरी खातून ने कहा कि दूध बेच कर रुपये इकट्ठा करके धान की खेती किए थे। बाढ़ के पानी में धान डूब गई। सुखई सहनी ने कहा कि मजदूरी करके पैसा जमा कर धान की खेती की है। बाढ़ के पानी में बह गया। उसी को देखने जा रहे हैं। मन तो नहीं मान रहा है। फिर भी क्या करुं। डूबे हुए फसल को देखकर ही संतोष कर रहे हैं। सबीना खातून, समीना खातून व सकीना बीबी ने कहा कि एक कट्ठा में सब्जी की खेती की, बाढ़ के पानी में डूब गई। सब्जी बेचकर घर व परिवार को चलाते थे मगर अब तो बाढ़ के कारण वह भी छीन गया है।

सड़क पर गुजार रहे हैं रात

जाकीर हुसैन ने कहा कि प्रशासन का गाड़ी आता है और चला जाता है। यहां रुकता नहीं है। सड़क के किनारे रात गुजार रहे है। मो. आफताब, मो. शोकत ने बताया कि बाढ़ की कहर में मेरा घर गिर गया। प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की अभी तक मद्द नहीं मिल रहा है। रात-बिरात डर लगता है कि तेज रफ्तार की वाहन कही पूरे परिवार को ही नहीं कुचल दे। डर कर रहते हैं और रतजगा कर समय बिताते हैं।

इलाज नहीं होने से घर में दम तोड़ा गरतु

गोढ़ियारी पंचायत के नया टोला के 60 वर्षीय गरतु दास की मौत गुरुवार की सुबह सात बजे हो गई। दो माह से वह बीमार था। बाढ़ के बीच उसकी तबीयत और बिगड़ गई। पीठ में दर्द बढ़ गया। उसके घर में कमर से ऊपर पानी है। अचानक रात को उसका तबीयत अधिक खराब हो गई। नाव की व्यवस्था नहीं होने से उसे डॉक्टर के पास नहीं पहुंचाया जा सका। इस बीच उसकी मौत गुरुवार सुबह हो गई। लाश को ले जाने के लिए एनडीआरएफ की टीम पहुंची। गांव पूरी तरह से मुख्य सड़क से कटा हुआ है। प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। इस घटना के बाद यहां के लोगों में काफी आक्रोश है। प्रशासन के खिलाफ नाराजगी है।

YOUR REACTION?

Facebook Conversations



Disqus Conversations