करोड़पति कारोबारी बने मुनि, 4 घंटे पहले टली पत्नी की दीक्षा, ऐसे चला पूरा घटनाक्रम
चित्तौड़गढ़

चित्तौड़गढ़.युवावस्था में कठोर वैराग्य लेने की भावना के चलते सुर्खियों में आए जैन दंपती सुमित व अनामिका राठौर की जोड़े से दीक्षा लेने की अभिलाषा अधूरी रह गई। शनिवार सुबह गुजरात के सूरत में जैनाचार्य रामलाल महाराज ने सुमित को भगवती दीक्षा दी। लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दखल के बाद सुमित की पत्नी अनामिका को दीक्षा नहीं दी जा सकी। दंपती के पौने तीन साल की बेटी इभ्या है। इस कारण आयोग ने मां को साध्वी की दीक्षा दिलाने से रोका है। हो चुकी थी पूरी तैयारी...

- नीमच में करोड़ों रुपए की संपति के मालिक 35 वर्षीय सुमित राठौर सुबह 8.15 बजे आचार्य के मुखारविंद से दीक्षा मंत्र लेने के साथ ही संत बन गए। हजारों लोगों की मौजूदगी में उनका नया नामकरण सुमित मुनि किया गया। सुमित के साथ पत्नी कपासन निवासी और भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष अशोक चंडालिया की बेटी अनामिका की भी दीक्षा होनी थी। इसके लिए पूरी तैयारी हो गई थी। एक दिन पहले सामूहिक बहुमान के साथ दोनों को मुंहपत्ती, ओगा आदि साधु वेश प्रदान करने की दीक्षा पूर्व की रस्में भी हो चुकीं थीं।

- इसी बीच शुक्रवार शाम छह बजे घटनाचक्र बदला। समाज, परिजनों से काफी मंथन के बाद आचार्यश्री और संघ ने आयोजन से करीब चार घंटे पहले तड़के चार बजे अनामिका की दीक्षा को फिलहाल रोकने का फैसला ले लिया।

आयोग के प्रसंज्ञान पर सूरत प्रशासन आया हरकत में

- कपासन के अभिषेक चंडालिया, जयपुर की डॉ. रचना नाहठा व नीमच के एनजीओ कार्यकर्ता कपिल शुक्ला आदि की राष्ट्रीय मानवाधिकार, बाल संरक्षण आयोग सहित विभिन्न स्तर पर इस दंपती की दीक्षा को लेकर शिकायत पहुंची थी। जिसमें कहा गया कि दोनों के दीक्षा लेने पर इनकी पौने तीन साल की बेटी इभ्या के अधिकार का हनन होगा।

- आयोग के सूरत कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर से मामले की जानकारी और रिपोर्ट मांगने पर शुक्रवार को पुलिस दीक्षा स्थल पर पहुंची। जहां सुमित व अनामिका ने भी दीक्षा लेने का ही बयान दिया। प्रशासन ने कानून का हवाला देते हुए फिलहाल एक दीक्षा रोकने को कहा। एक पुलिस इंस्पेक्टर पूरी रात आयोजन स्थल पर रहा।

रात 2.30 बजे कमिश्नर के पास पहुंचे पिता

- राठौर दंपती की दीक्षा के लिए दोनों के परिवारजनों व समाजजनों ने भरसक प्रयास किए। अनामिका के पिता भाजपा नेता अशोक चंडालिया ने रात 2.30 बजे पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचकर बच्ची के संबंध में आश्वस्त किया। बेटी के पालन पोषण के संबंध में दोनों परिवार के शपथ पत्र भी प्रशासन को सौंपे। अपने सियासी रसूखात का भी प्रयोग किया।

इसलिए नाम सुमित मुनि ही रखा

आचार्य श्री रामलाल ने दीक्षा के बाद नामकरण करते हुए कहा कि चूंकि इसी नाम से सात समंदर पार तक उनकी प्रसिद्धि फैल गई, इसलिए इनका यही नाम रखा जाता है।

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