15% बढ़कर 25 हजार करोड़ रुपए के हुए सिक्के: लोगों के पास ढेर, बैंक ले नहीं रहे
भोपाल/पटना/जयपुर/पानीपत

भोपाल/पटना/जयपुर/पानीपत.पटना का मशहूर महावीर मंदिर। हर दिन यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। दानपात्र में खूब सिक्के डालते हैं, लेकिन इन्हें लेकर आजकल मंदिर मैनेजमेंट अजीब मुसीबत में है। दरअसल, यहां भक्त हफ्ते में करीब दो लाख रुपए के सिक्के डाल जाते हैं। अब इन्हें बदलवाने में परेशानी हो रही है। मंदिर का अकाउंट इलाहाबाद बैंक में है। मैनेजर नागेन्द्र ओझा कहते हैं कि बैंक ने पिछले कुछ दिनों से सिक्कों को जमा कराने से रोक रखा है। बैंक का कहना है कि उनके पास जगह नहीं है। सिक्कों को लेकर यही हाल कई शहरों का है। नोटबंदी के बाद जिस छोटे नोट या सिक्के के बूते लेन-देन होता रहा, अब वही अघोषित गिरावट का शिकार हैं। तयशुदा लिमिट से 200-400 गुना ज्यादा सिक्के फुटकर बाजार में पहुंच रहे...

- बैंकों में सिक्काबंदी जैसा माहौल बन गया है। बैंक सिक्के डिपाॅजिट के तौर पर नहीं ले रहे हैं। जो ले भी रहे हैं, वे क्वाइन एक्ट-2011 के तहत हाथ बंधे होने का हवाला देते हैं।

- आरबीआई समेत कई बैंक मैनेजरों ने बताया कि 1 रु. से छोटे सिक्के 10 रु. तक और 1-10 रु. तक के सिक्के मैक्सिमम 1000 हजार तक कोई शख्स एक दिन में बैंक में जमा करा सकता है। यह नियम है।

- दूसरी तरफ आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में सिक्के 15% बढ़ गए हैं। बैंक में जमा होने वाली रकम की तयशुदा लिमिट से 200-400 गुना ज्यादा सिक्के फुटकर बाजार के जरिए थोक कारोबारियों तक हर हफ्ते पहुंच रहे हैं।

- बाजार में मार्च 2017 तक 25 हजार करोड़ के सिक्के थे। ये बदल नहीं रहे हैं, इसलिए कारोबारी पूंजी लॉक हो रही है।

सिक्कों के ढेर से परेशान हैं कारोबारी

- जयपुर के कारोबारी बाबूलाल सैनी बताते हैं कि वे सिक्के के ढेर से परेशान हैं। बैंक लेने को तैयार नहीं हैं। एक कारोबारी के एक लाख रु. के सिक्के न बदलने की बात पर जयपुर की चौड़ा रास्ता के एसबीआई ब्रांच के कैशियर ने कहा कि हम सिर्फ मंदिरों से जुड़े खातों में ही सिक्के का लेन-देन कर रहे हैं। एक-दो हजार के सिक्के होते तो भी शायद हम ले लेते, लेकिन एक लाख रुपए के सिक्कों का हम क्या करेंगे।

- पटना के भी कई कारोबारी घरानों, मंदिरों ने 


क्या कहता है सर्कुलर?
 को अपने यहां जमा सिक्कों का ढेर दिखाया। ये सिक्के लाखों रुपए के हैं। यह हालत तब है जबकि 18 जुलाई 2016 का आरबीआई का मास्टर सर्कुलर कहता है कि बैंक जमा सिक्के लेने से मना ही नहीं कर सकते।

- सर्कुलर कहता है बैंकों को सिक्के गिनने में परेशानी हो तो वे सिक्के गिनने की मशीन लगाएं या फिर उन्हें तौल कर लें।

- मुसीबत बने सिक्कों का समाधान, आरबीआई का रीजनल ऑफिस 2016 का मास्टर सर्कुलर बताता है। इसके मुताबिक, शिकायत मिलने पर कार्रवाई की बात कही जाती है। इसके उलट बैंकों के ब्रांच मैनेजर इस सवाल पर मैनपावर, बिजनेस पर असर और सिक्के रखने की जगह की कमी का हवाला देकर सिक्के नहीं ले नहीं रहे।

- रांची में एक एसबीआई ब्रांच के कैश इंचार्ज ने बताया कि हम ज्यादा-से-ज्यादा एक हजार के सिक्के ले सकते हैं, वह भी केवल 10 रुपए के ही। मेन ब्रांच हमसे सिक्के नहीं ले रहा, इसलिए हम लोगों से नहीं ले रहे। 

- उधर, आरबीआई के मैनेजर (बिहार-झारखंड) प्रसून कुमार शर्मा कहते हैं कि बैंक को कस्टमर्स के सिक्के लेने हैं। कस्टरमर्स बैंक में सिक्के जमा करा सकते हैं। अगर कोई बैंक सिक्के लेने से मना कर रहा है तो लोग बैंक के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं।

बैंक क्यों नहीं लेना चाहते हैं ज्यादा सिक्के?

एक उदाहरण बिहार का। बिहार में जिन बैंकों के पास करंसी चेस्ट है उनके पास नोट और सिक्के रखने की जगह ही नहीं है। चेस्ट का करीब 60% हिस्सा नोटबंदी के बाद चलन से बाहर हुए 1000 व 500 के पुराने नोटों से भरा पड़ा है। यह भी एक कारण है कि बैंक सिक्के लेना नहीं चाहते।

सिक्के बदलने का काला कारोबार भी पनप रहा है

छोटे कारोबारी अपने सिक्कों को खपाने के लिए उन्हें 10-20% पर बदल रहे हैं। जयपुरी के कारोबारी बाबूलाल सैनी ने बताया कि एक कारोबारी सिक्के बदलने का काम करता है। आप सौ रुपए के सिक्के ले जाओगे तो वो नोट में आपको 90 रुपए दे देगा। ऐसा कई शहरों में हो रहा है।

इन चार मामलों से समझें कैसे परेशानी बढ़ रही है

केस 1- नहीं बदल पा रहे हैं 35 लाख के सिक्के

पटना के एक कारोबारी के पास 35 लाख रुपए के सिक्के हैं। बैंक इन्हें बदलने को तैयार नहीं हैं। यहां पर सिक्के बाल्टियों में भर-भर कर रखे हुए हैं। कारोबारी ने बताया कि वो अब तक चार बैंकों के चक्कर लगा चुके हैं। लेकिन सिक्के नहीं बदल पा रहे हैं। पटना में ये स्थिति कई बड़े खुदरा व्यापारियों की है। शहर में 1500 से ज्यादा ऐसे कारोबारी हैं, जिनके पास 50 हजार से ज्यादा के चिल्लर हैं और उन्हें बदलने में परेशानी है।

केस 2- 2004 के बाद बने ऐसे हालात

भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स के ट्रेजरर कृष्ण कुमार बांगड़ बताते हैं कि उनके पास खुद 50 हजार के चिल्लर हैं, लेकिन बैंक इन्हें बदलने को तैयार नहीं हैं। 1000 सिक्के रोज बदलेंगे तो सारे सिक्के बदलने में तीन से चार महीने लग जाएंगे। 2004 के बाद पहली बार बाजार में इतनी चिल्लर आ गई है। उस वक्त लोगों को सैलरी तक चिल्लरों में दी गई थी। भोपाल में मशहूर चाय नाश्ते और पान की दुकानवालों के यहां तो 3 से 4 लाख सिक्कों से भरे थैले पड़े हैं।

केस 3- सिक्के के लिए पहुंचे थाने

हरियाणा के पानीपत में तो आम आदमी भी सिक्का लेने में घबरा रहा है। कोई इनके नकली होने से घबरा रहा है तो किसी को आगे चलन में न रहने का डर सता रहा है। सिक्के न चलने से हालात इतने ज्यादा खराब हैं कि जब एक दुकानदार ने सिक्के लेने मना कर दिया तो पानीपत के गांव डाहर निवासी पूर्ण सिंह ने इलाके के थाने में ही इसकी लिखित शिकायत दे दी। मंदिर के पुजारी से लेकर फेरीवाले तक यहां पर सिक्का लेने में घबरा रहे हैं।

केस 4 - 3 बैंकों के चक्कर लगाए, नहीं बदल पाए सिक्के

जयपुर के प्रशांत छोटे कारोबारी हैं। अपने एक लाख रु. के सिक्के बदलवाने के लिए वे तीन बैंकों के चक्कर काट चुके हैं। प्रशांत को किशनपोल बाजार के इलाहाबाद बैंक, एचडीएफसी बैंक, सहकार रोड के अपेक्स बैंक ने सिक्कों के साथ वापस लौटा दिया। अपेक्स बैंक में कैश काउंटर पर बैठे राधेश्याम ने तो कहा- हमारे खुद के बैंक में सिक्कों से भरे दो कट्‌टे रखे हुए हैं। इनका क्या करें? आपके 100-200 रुपए के सिक्के होते तो हम बदल देते। कथित सिक्काबंदी को लेकर भास्कर रिपोर्टर ने भी कई बैंको से बात की तो सभी ने कहा कि हम लाख रुपए तक के सिक्के नहीं बदल रहे हैं।

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