कभी थे दूरदर्शन के स्टार, आज मेलों में गाकर कर रहे गुजारा,100 से ज्यादा गीत गा चुके हैं
टांडा उड़मुड़.

टांडा उड़मुड़. कभी रेडियो और टीवी पर पंजाब के लोक गीत सुनाने वाले टांडा के मशहूर गायक उजागर सिंह मलंग आज गुमनामी और आर्थिक मंदहाली में हैं। 1963 से 1982 तक रेडियो स्टेशन जालंधर के नामवर कलाकार में रहे मलंग 76 साल की उम्र में भी जीवनयापन के लिए छोटे-मोटे प्रोग्राम कर रहे हैं। 1940 में नजदीकी गांव बैंच बाजा में जन्मे मलंग का बचपन राजस्थान के श्री गंगानगर में बीता। हायर सेकेंडरी के बाद शौक में गायकी को प्रोफेशन बनाया।ये है कारण...

मलंग ने संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली। बस अपने शौक के चलते मोहम्मद रफी के गीत सुनते-सुनते और स्कूल की बाल सभा में गाते हुए ही गाना सीख गए और शौक ही प्रोफेशन बन गया। लेकिन, मलंग जगत सिंह जग्गा को अपना उस्ताद मानते है। 1963 में रेडियो स्टेशन जालंधर पर उनका पहला गीत वे तू हल वाहवें मैं केरां, वेख के सिआड़ हसदे प्रसारित हुआ था। 1962 की चीन और 1965 की पाकिस्तान जंग के समय गाए उनके गीत दुनिया दे बंदेओ पूजो ओहना नेक इंसान नूं देश दी खातिर वार गए जो पिआरीआं-पिआरीआं जाना नूं, भाबी नी तोर मैनूं जंग नू बन्न के केसरी चीरा और मैं गभरू पंजाब दा मेरिआं रीसां कौण करे ने उन्हें पंजाब भर में मकबूल बना दिया। मशहूर गायका हरबंस किरण के साथ मलंग के गानों का एक रिकॉर्ड भी मार्किट में आया और मकबूल हुआ। उन्होंने 100 से अधिक लोक गीत गए।

मलंग को मलाल-बुढ़ापे में नहीं मिला कोई सहार

मलंगको मलाल है के रेडियो स्टेशन जालंधर दूरदर्शन जालंधर, जिसके लिए उन्होंने पूरी जिंदगी काम किया, ने मदद के लिए कुछ भी नहीं किया। ही पंजाब सरकार ने आर्थिक मदद की। उन्होंने पंजाब सरकार के सभ्याचारक विभाग से मांग की कि उन जैसे वृद्ध कलाकारों को सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए नीति बनाकर आर्थिक मदद दी जाए।

मलंग पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, 

राजीव गांधी

 और ग्रहमंत्री स्वर्ण सिंह की स्टेज पर भी गा चुके हैं। मलंग को कभी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी स्थानीय ज्ञानी करतार सिंह यादगारी सरकारी कॉलेज में और ग्रह मंत्री स्वर्ण सिंह स्थानीय शिमला पहाड़ी पार्क में हुई अपनी जन सभाओं में गाने के लिए खास तौर पर बुला चुके हैं। पर मलंग आज भी जीवनयापन के लिए धार्मिक प्रोग्रामों में गाते हैं और उससे ही गुज़ारा करते हैं।

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