सूरत में ट्रिपल आईटी, गुजरात पहला राज्य जहां ऐसे दो संस्थान
सूरत

सूरत.सरदार वल्लभ भाई पटेल नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी में आईआईआई-टी का सेंटर शुरू हो चुका है। आईआईआई-टी वड़ोदरा के बाद आईआईआई-टी सूरत शुरू होने से गुजरात देश का प्रथम ऐसा राज्य बन गया जहां दो-दो ट्रिपल आईटी के सेन्टर हैं। पीपीपी मोड पर चलने वाले इस सेंटर में 50 प्रतिशत फंड केन्द्र सरकार, 35 प्रतिशत राज्य सरकार और 15 प्रतिशत इंडस्ट्री का लगा है। ट्रिपल आईटी के सेंटर के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने खजोद में 50 एकड़ जमीन देने की सिफारिश वाला पत्र कलेक्टर को भेज दिया है। सूरत सेंटर शुरू होने से राज्य में इंडस्ट्री की मांग के मुताबिक स्किल्ड मैन पावर मिल पाएगा।

सेंटर के लिए आया 128 करोड़ रुपए का फंड

- आईआईआईटी सेंटर स्थापित करने के लिए 128 करोड़ दिया गया है। इसमें एमएचआरडी ने 50, गुजरात सरकार ने 35 और गुजरात गैस, जीएनएफसी भरूच एवं गुजरात इन्फरमेटिक्स ने 15 प्रतिशत फंड शामिल है।

- सेंटर में दो स्ट्रीम कम्प्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन में पढ़ाया जाएगा। डायरेक्टर डॉ. एसआर गांधी के अनुसार इन दोनों स्ट्रीम का सिलेबस इंडस्ट्री की डिमांड के अनुसार बनाया हैं।

हालात : अभी एसवीएनआईटी कैंपस में चल रहा सेंटर

- सूरत में आईआईआई-टी का सेंटर 25 जुलाई से एसवी-एनआईटी के कैम्पस में शुरू हो चुका है। एडमिशन की प्रक्रिया भी 3 अगस्त को पूरी हो गई। सूरत के लिए यह बड़ी बात है कि एनआईटी और आईआईआई-टी दोनों ही हैं। ट्रिपल आईटी के इस सेंटर में दो स्ट्रीम हैं और दोनों स्ट्रीम में 60-60 सीट्स रहेंगी।

- फिलहाल इस सेंटर की देखरेख एसवी-एनआईटी के फेकल्टी ही करेंगे। एसवी-एनआईटी के डायरेक्टर गांधी ने इस बारे में बताया कि अभी सेंटर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। जिन छात्रों का एडमिशन हो चुका है उनका अभ्यास भी चालू हो चुका है। 25 जुलाई से ही छात्रों की क्लास शुरू हो गई है।

बड़ा सवाल : वड़ोदरा का संस्थान अब भी गांधीनगर में ही

- ट्रिपल आईटी वड़ोदरा को शुरू हुए 4 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी यह सेंटर गांधीनगर स्थित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में चल रहा है। हालांकि एमएचआरडी ने 4 साल पहले ही वड़ोदरा के पास दुमाद में सेंटर के लिए 50 एकड़ जमीन आवंटित करने की सिफारिश कर दी थी, लेकिन आज तक वड़ोदरा में ट्रिपल आईटी का सेंटर नहीं बन पाया। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सूरत सेंटर की दशा भी वड़ोदरा सेंटर जैसे तो नहीं हो जाएगी?

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