तृणमूल छात्र परिषद की सभा में हुंकार भरेंगी ममता
कोलकाता,

कोलकाता, [जागरण संवाददाता]। तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के स्थापना दिवस के अवसर पर आज पार्टी के छात्र इकाई की ओर से महानगर में जनसभा का आयोजन होगा। धर्मतल्ला स्थित रानी रासमणि रोड पर जनसभा में मुख्य वक्ता के तौर पर पार्टी प्रमुख व राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उपस्थित रहेंगी। इस दौरान पार्टी के छात्र विंग से जुड़े हजारों छात्रों के जुटने की संभावना है जिस कारण ट्रैफिक की समस्या उत्पन्न हो सकती है। पार्टी की ओर से इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। 

तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को पार्टी के छात्र इकाई की ओर से महानगर में जनसभा का आयोजन होगा। धर्मतल्ला स्थित रानी रासमणि रोड पर जनसभा में मुख्य वक्ता के तौर पार्टी प्रमुख व राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उपस्थित रहेंगी। इस दौरान पार्टी के छात्र विंग से जुड़े हजारों छात्रों के जुटने की संभावना है जिस कारण ट्रैफिक की समस्या उत्पन्न हो सकती है। पार्टी की ओर से इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है।

रविवार रात से ही राज्य के विभिन्न जिलों से छात्रों का महानगर आना शुरू हो गया। इस दिन जिलों से आए छात्र सियालदह, हावड़ा स्टेशन से जुलूस निकाल कर दोपहर में धर्मतल्ला पहुंचें। सभा के संबंध में छात्र नेता प्रतीमा सेन ने बताया कि इसमें करीब एक लाख छात्रों के जुटने की संभावना है। उन्होंने कहा कि सभा में मुख्य वक्ता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी होंगी। इसके अलावा मंच पर शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, तृणमूल छात्र परिषद की नेता जया समेत पार्टी के कुछ अन्य प्रमुख नेता उपस्थित रहेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस मंच से एक बार फिर ममता बनर्जी भाजपा के खिलाफ हूंकार भरते हुए भारत छोड़ो का स्वर बुलंद करेंगी।

ऐसा इसलिए क्योंकि सुश्री बनर्जी ने इस अभियान का आगाज 9 अगस्त से किया था जिसे राज्यव्यापी 30 अगस्त तक संचालित किया जा रहा है। यह अभियान अपने अंतिम पड़ाव में है लिहाजा मंच के माध्यम से ममता बनर्जी एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साध सकती हैं। उल्लेखनीय है कि रविवार को पटना में राजद की रैली में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि आज देश में सांप्रदायिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। यह देश सभी धर्म के लोगों का है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नसबंदी में अगर इंदिरा चली गई तो नोटबंदी से भाजपा भी चली जाएगी।

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