डोकलाम विवाद पर भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, नहीं गई चीन की अकड़
नई दिल्ली/बीजिंगः

डोकलाम विवाद पर भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, नहीं गई चीन की अकड़

नई दिल्ली/बीजिंगः भूटान के दावे वाले डोकलाम इलाके में चीन के साथ 72 दिनों तक चली सैन्य तनातनी को शांतिपूर्वक बातचीत से समाप्त करने में भारत को अहम राजनयिक कामयाबी मिली। पिछले करीब अढ़ाई महीनों से भारत को डोकलाम से एकतरफा तौर पर पीछे हटने की चीनी धमकियों के बाद ‘ड्रैगन’ के पस्त होते ही चीनी सेना भारतीय सैनिकों के साथ पीछे हट गई है।

भारतीय सेना सिक्किम और डोकलाम की सीमा तक लौटेगी जबकि चीनी सैनिक डोकलाम इलाके पर अपने दावे के मुताबिक चौकसी बनाए रखेंगे। इस इलाके में भूटान के सैनिकों द्वारा भी गश्त की जाती है। भूटान के गश्ती दल ने ही सबसे पहले 16 जून को यह जानकारी दी थी कि चीनी सेना इस इलाके में सड़क बनाने आई है। इसके बाद भारतीय सेना ने वहां अपने जवान भेजकर चीनी सैनिकों को रोका। तब से 100 मीटर की दूरी पर दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने तैनात थे।

चीन की भारत को नसीहत

चीनी सेना ने इस फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन भारत को नसीहत भी दे डाली।

चीनी सेना के सीनियर कर्नल वु शियान ने कहा कि हम इस मामले के सुलझने से खुश हैं लेकिन भारत को इस मुद्दे से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन अभी भी इस मामले पर चौकन्ना रहेगा और अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि मुद्दा सुलझने से इलाके में भी शांति आएगी। हमारा लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए एक साथ काम करने का है।

गश्त कर रही है चीनी सेना

डोकलाम से जवानों को हटाने की आपसी सहमति की भारत की घोषणा को तवज्जो नहीं देते हुए चीन ने दावा किया कि उसके जवान इलाके में अब भी गश्त कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने इस तरह की धारणा को खारिज करने का प्रयास किया कि बीजिंग ने अपनी गलती को मान लिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने अपने जवानों को वापस बुला लिया है। हुआ ने कहा कि 28 अगस्त की दोपहर में भारत ने ‘‘घुसपैठ करने वाले सभी सैनिकों, संसाधनों को सीमा पर भारत की तरफ वापस बुला लिया।’’ हालांकि चीन डोकलाम इलाके में लगातार गश्त कर रहा है. उन्होंने इन सवालों का जवाब भी नहीं दिया कि क्या दोनों देशों के बीच गतिरोध को सुलझाने के लिए कोई आपसी सहमति हुई है।


पीएम मोदी जाएंगे चीन

सैनिकों को हटाने की दोनों देशों के बीच हुई सहमति के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन के शियामिन शहर में हो रही 5 देशों की ब्रिक्स शिखर बैठक में भाग लेने का रास्ता साफ हो गया है। यह शिखर बैठक 3 से 5 सितम्बर तक आयोजित होगी। डोकलाम विवाद की वजह से भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के चीन जाने के कार्यक्रम की पुष्टि नहीं की है। चीन ने भी इस बारे में मौन बरता है लेकिन यहां राजनयिक सूत्रों के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर ब्रिक्स देशों का भारी राजनयिक दबाव था कि ब्रिक्स शिखर बैठक से पहले डोकलाम विवाद को बातचीत से सुलझा लें। भारत को धमकी देते हुए चीन अब तक यही कह रहा था कि इस मसले पर भारत से तब तक बात नहीं होगी जब तक कि वह अपने सैनिक डोकलाम इलाके से हटा नहीं लेता लेकिन अब चीन द्वारा तनातनी के इलाके से सैनिकों को पीछे हटाने के लिए राजी होना भारत की भारी राजनयिक जीत कही जा सकती है।

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