जाट आरक्षण आंदोलन के तहत गांव धनाना में दिया धरना
Bhiwani Jat Aandolan News

जाट आरक्षण आंदोलन के तहत गांव धनाना में दिया धरना

आंदोलन के पहले दिन कोई अप्रिय घटना नहीं, पुलिस कप्तान ने लिया सुरक्षा व्यवस्था का जायजा, सांय पांच बजे तक चला धरना

भिवानी।  जाट आरक्षण आंदोलन के पहले दिन आज रविवार का दिन शांति से बीता। भिवानी जिले में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। आरक्षण आंदोलन के तहत जाट बाहुल्य गांव धनाना में जाटों ने भिवानी-जींद मार्ग के समीप धरना दिया। धरने की अध्यक्षता जाटू खाप के प्रधान सुबेदार राजमल घणघस ने की। धरने पर सुबह से ही लोगों ने पहुंचना शुरू कर दिया था। लोग अपने टैक्टर-ट्रलियों में धरना स्थल पर पहुंचे। इस बार धरने पर महिलाएं नहीं पहुंची। साथ ही युवाओं की संख्या भी आपेक्षित नहीं थी। धरने की कार्यवाई दिवान सिंह जाखड़ ने चलाई। धरने पर बैठे लोगों ने सरकार के विरूध नारेबाजी की। धरने को सांय पांच बजे तक चलाया गया। धरने में ब्लॉक समिति के पूर्व चेयरमैन प्रेम कुमार, पूर्व सरपंच रणबीर सिंह व किरपाल सिंह, धनाना-तृतीय के सरपंच नीतू, सतबीर पानू, राजकुमार मुंढाल, दिवान जाखड़, बलवान सिंह विशेष रूप से शामिल थे। धरने के समीप कोई भी पुलिस व्यवस्था नहीं थी। बीते कल शनिवार को पुलिस ने गांव धनाना में पहुंच कर लोगों से शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपील की थी। धरने पर पुलिस अधिकारियों की अपील और प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था का असर साफ दिखाई दे रहा था। आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव कुलदीप घणघस ने बताया कि जाट आरक्षण इस बार मुद्दा नहीं है। क्योकि जाट आरक्षण का मामला अदालत में लम्बित है। यह धरना दूसरे संवेदनशील मुद्दों पर है। उन्होने स्पष्ट किया कि किसी को भी शांति भंग करने नहीं दी जायेगी। धरने को शांतिपूर्ण चलाया जायेगा।  

      आरक्षण अंदोलन को लेकर जिला पुलिस ने भिवानी शहर में भी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की हुई थी। पुलिस ने शहर के महत्वपूर्ण स्थानों पर नाकें लगाए हुए थे। पुलिस कप्तान अशोक कुमार ने खुद जाकर जिले भर के नाकों का रिक्षण किया और व्यवस्था की जानकारी ली। पुलिस कप्तान ने नाकों पर नियुक्त पुलिसकर्मियों को आदेश दिए कि वे अपनी ड्यूटी में किसी तरह की ढील ना आने दें। काफिले में उनके साथ डीएसपी चंद्रपाल, जिला सिक्यूरिटी इंचार्ज कुलदीप सिंह भी थे। भिवानी जिले में छह टुकडिय़ों के साथ जवान चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए तैनात किए गए थे। सरकारी आदेशानुसार सरकारी कार्यालयों में अधिकारी मौजूद रहे।

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